
Cyber War पर मॉस्को ने पेरिस के आरोपों को नकारा, photo credit: AI
Russia France Tensions: रूस ने फ्रांस की ओर से लगाए गए साइबर हमलों और हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज करते हुए पेरिस पर 'रूसी खतरे' के मिथक को फिर से हवा देने का आरोप लगाया है। मॉस्को का कहना है कि फ्रांस द्वारा रूस को यूरोप में साइबर गतिविधियों और अस्थिरता से जोड़ना एक राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा है।
हालांकि, इस मामले में फ्रांस का रुख इसके बिल्कुल उलट है। फ्रांसीसी अधिकारियों ने जुलाई में रूस की संघीय सुरक्षा सेवा (FSB) के 16वें सेंटर पर फ्रांस में साइबर जासूसी गतिविधियों को अंजाम देने का आरोप लगाया था। फ्रांस के अनुसार, इन गतिविधियों में 'Turla' नामक साइबर ऑपरेशन का इस्तेमाल किया गया और इसका निशाना सरकारी, रक्षा, कूटनीतिक तथा तकनीकी क्षेत्र से जुड़े संस्थान थे।
रूस ने फ्रांस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि पेरिस लगातार 'रूसी खतरे' के मिथक को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मॉस्को के अनुसार, यूरोप में रूस को साइबर हमलों, दुष्प्रचार और राजनीतिक हस्तक्षेप से जोड़ना उसकी छवि खराब करने की रणनीति है।
वहीं, फ्रांस और यूरोपीय संघ का दावा है कि रूस से जुड़े साइबर नेटवर्क ने कई यूरोपीय देशों को निशाना बनाया है। यूरोपीय संघ ने भी जुलाई में रूस के साइबर इकोसिस्टम पर गंभीर आरोप लगाए थे और कुछ रूसी व्यक्तियों तथा संस्थाओं के खिलाफ प्रतिबंध लगाए थे।
यूक्रेन युद्ध के बाद फ्रांस और रूस के संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। साइबर सुरक्षा, दुष्प्रचार और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद कूटनीतिक तनाव को और बढ़ाया है।
फ्रांस ने रूस के कथित साइबर अभियानों को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया है और कहा है कि वह ऐसे हमलों को रोकने तथा उनका जवाब देने के लिए सहयोगी देशों के साथ काम करेगा।
ऐसे में रूस और फ्रांस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर केवल साइबर सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यूरोप की व्यापक भू-राजनीतिक स्थिति और यूक्रेन संघर्ष से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
Updated on:
25 Aug 2026 06:42 pm
Published on:
25 Aug 2026 06:41 pm
