
फोटो में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर (सोर्स: ANI और आईएएनएस)
US-Iran Tensions: मिडिल-ईस्ट में तनाव के बीच पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर का ईरान दौरा चर्चा में है। सवाल बड़ा है। क्या इस दौरे से ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होगा? या फिर हालात और बिगड़ेंगे?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के सामने एक बड़ा प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव को आसिम मुनीर के जरिए तेहरान तक पहुंचाया गया। इसमें होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की बात है। इसके बदले अमेरिका समुद्री ब्लॉकेड और आर्थिक पाबंदियों में राहत देने को तैयार होगा।
बता दें होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। यहां तनाव बढ़ने से तेल और वैश्विक कारोबार पर सीधा असर पड़ सकता है। इसलिए इस पूरे मामले पर दुनिया की नजर है।
‘अल अरबिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रस्ताव में दो मुख्य बातें हैं। पहली, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही सामान्य हो। दूसरी, ईरान से जुड़े क्षेत्रीय समूह अपने हमले रोकें। यानी सीधा निशाना हिजबुल्लाह की तरफ है। बता दें हिजबुल्लाह ईरान समर्थित संगठन है, जिसे अमेरिका और इजरायल टेररिस्ट ऑर्गेनाइजेशन मानते हैं। बार-बार हिजबुल्लाह अमेरिका और इजरायल दोनों पर एक साथ मिसाइल दागे हैं। यही कारण है कि अमेरिका अपनी शर्तों में हमले रोकने की बात कर रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन सब के बदले वॉशिंगटन समुद्री नाकेबंदी और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने पर विचार कर सकता है। यानी अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिश की जा रही है। बताया गया है कि यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और आसिम मुनीर के बीच हुई बातचीत के बाद सामने आया। मुनीर ने तेहरान में ईरानी अधिकारियों से भी बातचीत की।
उन्होंने ईरान से जुड़े समूहों के सैन्य अभियानों को तुरंत रोकने की मांग की। साथ ही जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14-पॉइंट समझौते के ढांचे पर फिर से लौटने की अपील की।
ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को आसानी से स्वीकार नहीं किया। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका से पहले ठोस कदम उठाने की मांग की। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल से जुड़े मोहसेन रेजाई ने होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की सुरक्षा भूमिका पर जोर दिया। उनका कहना था कि अमेरिका को अपना रवैया बदलना होगा।
वहीं ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर ग़ालिबफ ने भी अमेरिका पर पुराने समझौतों को तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के बीच भरोसा कमजोर हुआ है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी अमेरिका की धमकी और दबाव की नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण सहयोग के लिए तैयार है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल होर्मुज स्ट्रेट को लेकर है। अगर यहां आवाजाही सामान्य होती है, तो क्षेत्रीय तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। लेकिन इसके लिए ईरान और अमेरिका दोनों को कुछ कदम पीछे हटने होंगे। ईरान को अपने क्षेत्रीय सहयोगी समूहों पर दबाव बनाना होगा। वहीं अमेरिका को प्रतिबंधों और नाकेबंदी में राहत देनी होगी।
Updated on:
25 Aug 2026 05:46 pm
Published on:
25 Aug 2026 05:46 pm
