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होर्मुज बंद कर ईरान ने बनाया दवाब, अमेरिका ने मान ली शर्तें, US-Iran Peace Deal पर क्या कह रहे एक्सपर्ट्स

US-Iran peace deal को लेकर एक्सपर्ट्स के बयान सामने आए हैं। ग्लोबल अफेयर्स एनालिस्ट ब्रेट मैकगर्ट ने कहा कि ट्रंप ने उन सभी बातों को मान लिया है, जो शायद ही कभी अमेरिका उन्हें मानता। ब्रह्म चेलानी ने भी डील को लेकर एक्स पर पोस्ट लिखा है।

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Jun 18, 2026
US Iran Deal New twist News
अमेरिकी प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप । (फोटो- ANI)

US-Iran peace deal MoU: अमेरिका और ईरान ने युद्ध खत्म करने को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में समझौता पर हस्ताक्षर के बाद मीडिया को चिल्लाकर कहा कि डील साइन हो गया, जबकि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने डिजिटली हस्ताक्षर किए। इस शांति समझौते को लेकर एक्सपर्ट ने हैरानी जताई है। विशेषज्ञों ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान को तुरंत राहत दे दी, जबकि ईरान ने बदले में सिर्फ पुरानी बातें दोहराई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करके ईरान ने दबाव बनाया और अमेरिका उसकी शर्तें मानने को तैयार हो गया।

सीएनएन के ग्लोबल अफेयर्स एनालिस्ट ब्रेट मैकगर्ट, जोकि पूर्व में अमेरिकी प्रशासन में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ पदों काम कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि MoU के टेक्स्ट से पता चलता है कि ईरान को बदले में कितना कुछ मिल गया है, जो उसे शायद ही कभी मिलता।

ब्रेट ने कहा कि इस MoU से ऐसा लगता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही तय कर लिया था कि मौजूदा हालात के बदले कोई भी समझौता एक बेहतर विकल्प होगा। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक करके दुनिया में तेल के प्रवाह को बाधित कर दिया। इससे वैश्विक स्तर पर तेल के दाम बढ़े और अमेरिका पर दबाव बढ़ा। ईरान की यह नीति काम कर गई। इस समझौते का मतलब यह है कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर गोली न चलाने के बदले बहुत कुछ मिल रहा है।

ब्रेट ने कहा कि पहला चरण अभी शुरू हो रहा है और दूसरे चरण में बाकी सभी चीजों को एक फाइनल एग्रीमेंट में सुलझाया जाएगा, जिस पर अगले 60 दिनों में बातचीत होगी। आपसी सहमति से इस 60 दिन की अवधि को बढ़ाया जा सकता है।

इस डील से ईरान को क्या मिला?

अमेरिकी ग्लोबल स्ट्रेटिजिस्ट ब्रेट ने कहा कि समझौते पर साइन होते ही अमेरिका ने कई बड़े कदम उठाए। नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई। ईरान के तेल निर्यात पर छूट मिल गई, जिससे ईरान को हर साल 60-70 अरब डॉलर तक का फायदा हो सकता है। फ्रीज की गई संपत्तियां भी रिलीज करने की बात है। ईरान के सेंट्रल बैंक को तय करने का अधिकार मिला है कि पैसा कहां जाएगा। इसके अलावा, होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पहले के स्तर पर लाने के लिए ईरान को सिर्फ रुकावटें हटानी हैं। अमेरिका ने सैन्य ताकत भी पीछे खींचने की तैयारी दिखाई।

परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान ने क्या कहा?

ब्रेट मैकगर्ट ईरान ने फिर से कहा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। उन्होंने आगे कहा कि यह नई बात नहीं है। इस डील में जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया है, वह कमोबेश ओबामा काल के JCPOA की भाषा जैसी ही है। उन्होंने कहा कि उस समय ओबामा प्रशासन ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को काफी नुकसान पहुंचाया था, लेकिन इस MoU में ईरान ने संवर्धित यूरेनियम को लेकर कोई ठोस वादा नहीं किया गया है। सब कुछ 60 दिनों में होने वाले अंतिम समझौते पर टाल दिया गया।

यूएस-ईरान पीस डील पर क्या कह रहे भारत के एक्सपर्ट

भारत के जाने माने सामरिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी ने ईरान-अमेरिका शांति समझौते पर लिखा, 'ईरान ने दिखाया है कि कठोर कूटनीति और कुशल बातचीत के जरिए एक बहुत कमजोर देश भी दुनिया की महाशक्ति कहे जाने वाले देश से लगभग बराबरी की शर्तों पर एक फ्रेमवर्क समझौता हासिल कर सकता है। जिसने उसके खिलाफ आक्रामक युद्ध शुरू किया था।

उन्होंने इस डील को भारत-यूएस ट्रेड डील से जोड़ते हुए आगे लिखा कि फरवरी में अमेरिका और भारत के बीच तय हुए व्यापार फ्रेमवर्क में भारत की जिम्मेदारियों को सबसे आगे रखा गया। इन जिम्मेदारियों को स्पष्ट, मापने योग्य और आसानी से निगरानी योग्य बनाया गया, जबकि अमेरिका की प्रतिबद्धताओं को चरणबद्ध, शर्तों वाली और किसी भी समय वापस लेने योग्य रखा गया। हालांकि, यही असंतुलित और एकतरफा ढांचा अब दोनों देशों के बीच हो रहे अंतिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते की मुख्य नींव बन गया है, जो जल्द ही पूरा होने वाला है।

Published on:
18 Jun 2026 09:02 am