Akhand Bharat: जिन देशों में आज जाने के लिए हमें वीजा की जरूरत पड़ती है, जो आज भारत के लोगों के लिए विदेश है, वो एक समय में भारत का ही हिस्सा हुआ करता था, इन अलग हुए देशों में आज के मुस्लिम देश भी हैं।
Akhand Bharat: भारत के कई इतिहासकारों ने अपनी पुस्तकों में अखंड भारत की अवधारणा दी है। वहीं गुप्त, मौर्य वंश के वक्त के इतिहास में भी अखंड भारत का वर्णन मिलता है। ये भारत के प्राचीन भूगोल और इतिहास को बताता है। अखंड भारत में वर्तमान भारत के अलावा कई दूसरे देश शामिल थे। ये समय के साथ अलग-अलग वजहों के चलते बंट गए और अलग देश के रूप में बस गए। ये देश कौन हैं और कैसे ये भारत से अलग हो गए, ये हम आपको बता रहे हैं।
भारत (India)
पाकिस्तान (Pakistan)
बांग्लादेश (Bangladesh)
नेपाल (Nepal)
भूटान (Bhutan)
श्रीलंका (Sri Lanka)
मालदीव (Maldives)
अफगानिस्तान (Afghanistan)
म्यांमार (Burma)
तिब्बत का कुछ हिस्सा (Tibet, चीन का हिस्सा)
अफगानिस्तान का इतिहास मौर्य और गुप्त साम्राज्य के समय में पता चलता है। अफगानिस्तान का कुछ हिस्सा भारतीय साम्राज्य के अंतर्गत था। 7वीं सदी के बाद इस्लाम ने जब भारत में कदम रखा, तब विदेशी आक्रमणों के चलते ये अलग हो गया। 18वीं सदी में अहमद शाह अब्दाली ने अफगानिस्तान को एक आजाद देश के रूप में स्थापित कर दिया।
म्यामांर का प्राचीन नाम आपने बर्मा सुना होगा। जी हां बर्मा ब्रिटिश साम्राज्य के दौरान तक भारत का ही हिस्सा था। 1937 में बर्मा को भारत से अलग कर दिया गया और एक नया औपनिवेश बना दिया गया। 1948 में म्यांमार को आजादी मिली और वो एक अलग देश बन गया।
नेपाल सांस्कृतिक और धार्मिक नजरिए से भारत के काफी करीब रहे हैं। ये हमेशा से स्वतंत्र राज्य रहा है, लेकिन भारत के साम्राज्यों के साथ गहरे संबंध बनाए हुए हैं। मौर्य और गुप्त काल यहां तक महाभारत काल तक में नेपाल का जिक्र है। पर भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक प्रभाव देखा गया। ब्रिटिश भारत के दौरान नेपाल और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच टकराव हुआ जिसका नतीजा ये हुआ कि 1814 से 1816 में गोरखा युद्ध के बाद नेपाल ने सुगौली संधि (Treaty of Sugauli) पर हस्ताक्षर कर दिए। जिसके तहत नेपाल ने अपने कुछ इलाके जैसे सिक्किम, कुमाऊं, गढ़वाल, तराई ब्रिटिश भारत को सौंप दिए।
मौर्य काल के दौरान अशोक के समय श्रीलंका पर भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक प्रभाव पड़ा। हालांकि ये हमेशा एक स्वतंत्र द्वीप राष्ट्र रहा है। सम्राट अशोक ने (268–232 ई.पू.) के समय और उनके पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा ने बौद्ध धर्म का प्रचार करने के लिए श्रीलंका का दौरा किया था, ये इसी का परिणाम है कि बौद्ध धर्म श्रीलंका का मुख्य धर्म बन गया और ये आज भी बहुसंख्यक धर्म है।
मालदीव पर भारतीय का प्रभाव साफ झलकता है। खासकर इसके हिंदू और बौद्ध काल में इसे ज्यादा प्रभावी तरीके से देखा गया। ये द्वीप समूह भी हमेशा एक अलग राज्य रहा।
1947 में भारत का विभाजन धार्मिक आधार पर हुआ, जिससे पाकिस्तान बना गया। य़े भारत का पश्चिमी भाग था। वहीं 1971 में पूर्वी भाग बांग्लादेश बन गया। हालांकि ये पूर्वी भाग भी 1947 के बंटवारे में पाकिस्तान के पास चला गया था।
तिब्बत का कुछ हिस्सा भारतीय साम्राज्यों के अधीन था। मौर्य वंश के सम्राट अशोक ने तिब्बत में भी बौद्ध धर्म का प्रचार किया। तिब्बत ने भारतीय बौद्ध परंपराओं को बेहद गहराई से अपनाया है। लेकिन 1950 में चीन ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया, और अभी भी इसे अपना इलाका बताता है।
आपको बता दें कि अखंड भारत की बात एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अवधारणा है, जिसमें भारत के साथ-साथ वो इलाके शामिल हैं, जो सांस्कृतिक, धार्मिक, और ऐतिहासिक तौर पर भारतीय उपमहाद्वीप से जुड़े रहे हैं। हालांकि इस अवधाराणा में कुछ इलाकों को छोड़कर राजनीतिक एकीकरण नहीं है। इसमें वे सभी क्षेत्र आते हैं जो भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रहे हैं ना कि राजनीतिक एकीकरण का।