
चीन दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। यह संभावना व्यक्त की जाती रही हैं कि चीन अगले कुछ दशकों में अमरीका को पछाड़कर विश्व का सबसे धनी देश बन जाएगा। अमरीका अपना ताज आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। यही वजह है कि एशिया से लेकर अफ्रीका तक दोनों देशों में व्यापारिक शीतयुद्ध चल रहा है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत और अमरीका नजदीक आए हैं, तो स्वाभाविक है कि दोनों देशों के व्यापारिक संबंध भी पहले से ज्यादा मजबूत हुए हैं। लेकिन अब चीन चाहता है कि अमरीका के खिलाफ आर्थिक लड़ाई में भारत उसका साथ दे। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार चीन की मदद के लिए तैयार हो जाएगी।
मिलकर करें अमरीका की व्यापार संरक्षणवादी नीतियों का मुकाबला
दरअसल चीनी दूतावास की तरफ से बुधवार को बयान जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि भारत औऱ् चीन को मिलकर व्यापार संरक्षणवाद से मुकाबले करना चाहिए। चीन का मानना है कि अमरीका एकतरफा पहल करके व्यापारिक विवादों को हवा देता है। चीन का कहना है कि भारत और चीन दुनिया के दो बड़े विकासशील देश है। साथ ही ये दोनों देश दुनिया के सबसे बड़े उभरते हुए बाजार भी हैं। अगर ये दोनों देश एकजट हो जाएं, तो अमरीका की संरक्षणवादी नीतियों का मुकाबला ज्यादा कारगर ढंग से कर सकेंगे।
सितंबर के बाद अमरीका-चीन व्यापार युद्ध में आई तेजी
चीनी दूतावास के प्रवक्ता जी रोंग ने अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध के बारे में कहा, अमरीका दुनियाभर में फ्री ट्रेड का नारा देता रहा है, लेकिन खुद "राष्ट्रीय सुरक्षा और 'मुक्त व्यापार' के नाम पर एकतरफा व्यापार संरक्षणवाद को बढ़ावा दे रहा है, जिससे भारत और चीन के हित प्रभावित होते हैं। इससे दोनों देशों की तरक्की में भी बाधा पड़ेगी। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं होने की वजह से भारत और चीन के हित समान हैं। दरअसल अमरीका और चीन के बीच सितंबर के महीने से ही व्यापार युद्ध से पहले से ज्यादा तेजी नजर आ रही है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब चीन से आयात पर 200 अरब डॉलर टैरिफ लगाया, तो चीन ने भी कड़ा जवाब देते हुए अमरीका से होने वाले आयात पर 60 अरब डॉलर का टैरिफ लगा दिया था।