1 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सऊदी अरब पर हूतियों के हमलों का रूसी कनेक्शन! हमले से पहले सैटेलाइट जुटा रहे थे खुफिया जानकारी

रूस के सैन्य सैटेलाइट हूती विद्रोहियों को सऊदी अरब के ठिकानों की खुफिया जानकारी देने में मदद कर रहे हैं? एक जांच में 40 हमलों से पहले और बाद में रूसी सैटेलाइट की निगरानी का दावा किया गया है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भारत

•

image

Pratiksha Gupta

•

Updated: 1 Nov 2026, 9:22 AM IST

Russia Satellites

सऊदी अरब पर हूतियों के सटीक हमलों का रूसी कनेक्शन (फोटो सोर्स-@MarioNawfal)

यमन के हूती विद्रोहियों को सऊदी अरब के सैन्य और तेल ठिकानों पर हमले करने में रूस की मदद मिलने का दावा किया गया है। एक जांच के मुताबिक, रूसी सैन्य सैटेलाइट हमलों से पहले निशाने वाले इलाकों की निगरानी कर रहे थे। सितंबर में सऊदी अरब की अहम ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन के तीन पंपिंग स्टेशनों पर हुए हमलों के बाद यह मामला चर्चा में आया है। जांच में जुलाई से अक्टूबर के बीच सऊदी अरब पर हुए 40 मिसाइल और ड्रोन हमलों का विश्लेषण किया गया। हालांकि, रूस ने इन निष्कर्षों पर अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

अंतरिक्ष से निगरानी और जमीन पर सटीक निशाना

जिनेवा स्थित AURORAH जियोसिग्नल इंटेलिजेंस द्वारा की गई एक जांच में खुलासा हुआ है कि सऊदी अरब पर हुए 40 से अधिक मिसाइल और ड्रोन हमलों के पीछे एक खास पैटर्न काम कर रहा था। जांच के अनुसार, हमलों से ठीक पहले और बाद में रूसी सेना और सरकार के एडवांस टोही सैटेलाइट्स प्रभावित इलाकों की लगातार मैपिंग और निगरानी कर रहे थे। जांच टीम के अनुसार, रूस के अलग-अलग रडार और कैमरों वाले सैटेलाइट्स (जैसे Bars-M, Persona, Lotos-S1 और Kondor-FKA) ने एक साथ मिलकर काम किया। इसी सटीक जानकारी के दम पर हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के सुरक्षा घेरे को भेदकर हमले किए।

ईस्ट-वेस्ट पेट्रोलाइन पर हमला, इंजीनियरिंग कमजोरियों का उठाया फायदा

इस सैटेलाइट मदद का सबसे बड़ा उदाहरण सऊदी अरब की रणनीतिक रूप से बेहद अहम 'ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन' के पंपिंग स्टेशनों (PS8, PS9 और PS11) पर हुआ सटीक हमला है। ये तीनों स्टेशन पाइपलाइन के पश्चिमी और ऊंचाई वाले हिस्सों में स्थित हैं, जो इसके संचालन के लिए बेहद नाजुक माने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर का सटीक हमला यह साबित करता है कि हमलावरों के पास केवल बुनियादी जानकारी नहीं थी, बल्कि उनके पास बुनियादी ढांचे की इंजीनियरिंग से जुड़ी कमजोरियों और भौगोलिक महत्व की बेहद सटीक सैटेलाइट जानकारी उपलब्ध थी।

ईरान का नेटवर्क और रूस का हाई-टेक बैकअप

यमन में हूती विद्रोहियों की ताकत और उनका मजबूत होता सैन्य नेटवर्क अब केवल एक स्थानीय संघर्ष नहीं रह गया है। विश्लेषकों के अनुसार, रूस का सैन्य भू-स्थानिक और सिग्नल इंटेलिजेंस सपोर्ट ईरान के नेतृत्व वाले खुफिया तंत्र के माध्यम से हूतियों तक पहुंच रहा है। यमन के लाल सागर तट और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर हूतियों के बढ़ते प्रभाव में के पीछे यही त्रिकोणीय तालमेल काम कर रहा है- रूस की सैटेलाइट तकनीक, ईरान का मार्गदर्शन और स्थानीय मुखबिरों की जानकारी।

दुनिया और तेल बाजार पर क्या पड़ेगा असर?

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि रूस के इस अप्रत्यक्ष समर्थन से यमन युद्ध का पूरा माहौल बदल गया है। अब यह जंग सिर्फ दो गुटों की नहीं, बल्कि बड़ी महाशक्तियों की कूटनीतिक लड़ाई बन चुकी है। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र (UN) में भी रूस हूती विद्रोहियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने का विरोध करता रहा है। रूस और ईरान के बीच बढ़ती दोस्ती और हथियारों की इस सांठगांठ से न केवल सऊदी अरब की चिंताएं बढ़ गई हैं, बल्कि आने वाले दिनों में दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर भी बुरा असर पड़ सकता है।