ईरान और अमेरिका के बीच तनाव जारी है। ट्रंप ने कहा कि हम ईरानी सरकार के साथ बातचीत को तैयार है। इधर, मीडिल ईस्ट में 6 जहाज भी अमेरिका ने तैनात किए हैं। पढ़ें पूरी खबर...
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिकी नौसेना का बड़ा बेड़ा भी पर्सियन खाड़ी में पहुंच चुका है। एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन और कई डिस्ट्रॉयर ईरान के निकट हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान से बातचीत की योजना बना रहे हैं। ट्रंप ने कैनेडी सेंटर में पत्रकारों से कहा कि इस समय हमारे बहुत बड़े और बेहद ताकतवर जहाज ईरान की ओर बढ़ रहे हैं। यह अच्छा होगा अगर हमें उनका इस्तेमाल न करना पड़े। अमेरिकी अधिकारियों की मानें तो US नेवी के 6 जहाज मिडिल ईस्ट में दाखिल हो गया हैं। बीते 48 घंटों में USS डेलबर्ट डी ब्लैक नाम का जहाज भी इस इलाके में पहुंच गया है।
जून में चले 12 दिनों के सैन्य झड़प के बाद ईरान ने अपनी मिलिट्री तैयारी तेज कर दी है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को एक हजार नए ड्रोन मिले हैं। तेहरान को लगता है कि मेरिका की शर्तों पर कोई समझौता करना युद्ध से ज्यादा महंगा साबित होगा। लेबनान के मिलिशिया संगठन हिज्बुल्लाह से जुड़े अल अखबार ने रिपोर्ट की है। मध्य एशिया में हिज्बुल्लाह को ईरान का प्रॉक्सी संगठन माना जाता है।
जानकारों का कहना है कि ईरान ने अलग-अलग श्रेणियों के ड्रोन तैयार किए हैं। इनमें लड़ाकू, हमला करने वाले, निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध से जुड़े ड्रोन हैं। ईरानी वैज्ञानिकों ने इन ड्रोन्स को जमीन से जमीन, समुद्र और हवा में मौजूद दुश्मन को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है।
सामरिक मामलों के जानकारों का कहना है कि अमेरिकी हमले से ईरान में तख्तापलट होने की उम्मीद सबसे अधिक है। उनका कहना है कि डॉलर के मुकाबले ईरानी रियाल गिरने की वजह से वहां की रीजिम को लेकर लोगों में अलोकप्रियता बढ़ी है। पिछले कुछ सालों में हर नया विरोध प्रदर्शन सरकार को कमजोर करता है। फिर भी ईरान में एक मजबूत सुरक्षा तंत्र है। इसके कारण वहां इस्लामिक रीजिम बरकरार है।