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हॉर्मुज पर टोल की मांग से दुनिया चिंतित, क्या अब गुजरने वाले जहाजों पर लगेगा शुल्क?

ईरान की हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर टोल लगाने की मांग से वैश्विक चिंता बढ़ गई है। तेल आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री आवाजाही को लेकर बहस तेज हो गई है।

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Apr 10, 2026
Strait of Hormuz

Oil Supply Crisis: दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति लंबे समय से समुद्री मार्गों पर निर्भर रही है, जिनमें कुछ रास्ते बेहद रणनीतिक माने जाते हैं। हॉर्मुज स्ट्रेट एक अहम जलमार्ग है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

अमेरिका और इजराइल के साथ हालिया युद्ध के बाद ईरान ने इस मार्ग पर नियंत्रण बढ़ाते हुए टोल वसूलने की मांग रख दी है। इससे अंतरराष्ट्रीय कानून, व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस छिड़ गई है।

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Hormuz Strait पर कितना लगेगा जहाज शुल्क

Hormuz Strait केवल 34 km चौड़ा जलमार्ग है, जो पर्शियन गल्फ को इंडियन ओशन से जोड़ता है और दुनिया के करीब 20% तेल का ट्रांजिट यहीं से होता है। युद्ध के दौरान ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स ने कई जहाजों पर हमले किए और आवाजाही को बाधित कर दिया, जिससे ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस गहरा गया। अब ईरान चाहता है कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाज ट्रांजिट फीस दें। रिपोर्ट्स के अनुसार यह फीस जहाज के प्रकार, कार्गो और परिस्थितियों के आधार पर तय होगी, जबकि कुछ दावों में प्रति बैरल 1 डॉलर तक टोल और क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान की बात भी सामने आई है।

समुद्री कानून: जहाजों की स्वतंत्रता

संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के अनुसार किसी भी अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए केवल अनुमति के नाम पर शुल्क नहीं लिया जा सकता। सभी देशों को मुक्त और सुरक्षित आवाजाही का अधिकार होता है। हालांकि सीमावर्ती देश पायलटिंग, टगिंग या पोर्ट सेवाओं के लिए सीमित शुल्क ले सकते हैं, लेकिन यह सामान्य ट्रांजिट फीस नहीं होती। इसी वजह से ईरान की मांग को अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ माना जा रहा है। ईरान ने ओमान के साथ मिलकर परमिट सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन ओमान ने कहा कि ऐसी कोई योजना नहीं है।

UAE: जलमार्ग पर किसी का नियंत्रण नहीं

स्वेज नहर और पनामा नहर जैसे जलमार्ग मानव निर्मित हैं, इसलिए वहां टोल लेना वैध है। इसके विपरीत Hormuz Strait एक प्राकृतिक जलडमरूमध्य है, जहां मुक्त ट्रांजिट का सिद्धांत लागू होता है। इसी तरह सिंगापुर स्ट्रेट में भी कोई टोल नहीं लिया जाता, जबकि तुर्की स्ट्रेट्स में मॉन्ट्रो कन्वेंशन के तहत केवल सीमित सेवा शुल्क ही संभव है। ईरान की इस मांग ने खाड़ी देशों और वैश्विक शक्तियों को चिंतित कर दिया है। UAE ने कहा कि यह जलमार्ग किसी देश के नियंत्रण में नहीं हो सकता, जबकि कतर ने मुक्त आवाजाही की वकालत की। अमेरिका ने भी साफ किया है कि किसी भी शांति समझौते में तेल का निर्बाध प्रवाह जरूरी होगा।

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Published on:
10 Apr 2026 04:02 pm
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