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शी जिनपिंग के US दौरे का आखिरी पड़ाव National Archives ही क्यों? जानिए डोनाल्ड ट्रंप के साथ यहां जाने की खास वजह

Donald Trump: चीन के राष्ट्रपति के अमेरिका के दौरे का आखिरी पड़ाव नेशनल आर्काइव्स रखा गया है। यह वही जगह है जहां अमेरिका के स्वतंत्रता की घोषणा (डेक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस), संविधान और अन्य वे दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्होंने अमेरिकी सरकार की नींव रखी थी।
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Sep 25, 2026
Donald Trump and Xi Jinping
Donald Trump and Xi Jinping (Photo - Washington Post)

Xi Jinping US Visit: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीन दिवसीय मुलाकात का अंत कूटनीतिक बातचीत की मेज पर नहीं, बल्कि अमेरिका के ऐतिहासिक दस्तावेजों के सामने होगा। डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया, शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन को नेशनल आर्काइव्स का दौरा कराएंगे। यह वही जगह है जहां अमेरिका के स्वतंत्रता की घोषणा (डेक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस), संविधान और अन्य वे दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्होंने अमेरिकी सरकार की नींव रखी थी।

अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ का भी कनेक्शन

डेलावेयर यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर युआनचोंग वांग ने कहा कि अमेरिका इस साल अपनी स्थापना की 250वीं वर्षगांठ मना रहा है। उनके अनुसार, इसी व्यापक पृष्ठभूमि में यह दौरा रखा गया हो सकता है। नेशनल आर्काइव्स वॉशिंगटन में अमेरिकी संसद भवन और व्हाइट हाउस के बीच स्थित है।

यहां रखे हैं अहम दस्तावेज

नेशनल आर्काइव्स की इमारत में स्वतंत्रता की घोषणा, संविधान और बिल ऑफ राइट्स के मूल दस्तावेज हैं। यहां 1863 में अब्राहम लिंकन की ओर से जारी एमैनसिपेशन प्रोक्लेमेशन भी रखा है। नेशनल आर्काइव्स एंड रिकॉर्ड्स एडमिनिस्ट्रेशन के देशभर में 40 केंद्र हैं, जिनमें 15 क्षेत्रीय रिकॉर्ड सेंटर और 15 राष्ट्रपति पुस्तकालय शामिल हैं। यहां तीन अहम समझौतों के रिकॉर्ड भी रखे हैं। 1972 का शंघाई कम्युनिके रिचर्ड निक्सन प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी में है। 1979 का जॉइंट कम्युनिके ऑन नॉर्मलाइजेशन जिमी कार्टर प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी में रखा है। 1982 का अगस्त 17 कम्युनिके रोनाल्ड रीगन प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी में सुरक्षित है। इनमें चीन-अमेरिका संबंधों से जुड़े अहम समझौते शामिल हैं।

चीन-अमेरिका संबंधों की पुरानी यादें

आर्काइव्स में दोनों देशों के साझा इतिहास से जुड़े लाखों पन्ने हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान चीन-बर्मा-भारत क्षेत्र में अमेरिकी सेना की गतिविधियों के रिकॉर्ड भी सुरक्षित हैं। 1971 की 'पिंग-पोंग डिप्लोमेसी' से जुड़े दस्तावेज भी मौजूद हैं, जिसने 1972 में रिचर्ड निक्सन की चीन यात्रा का रास्ता तैयार करने में मदद की। नेशनल आर्काइव्स में अमेरिका पहुंचे शुरुआती चीनी प्रवासियों से जुड़े हजारों रिकॉर्ड भी हैं। इनमें पूछताछ के दस्तावेज और परिवारों की तस्वीरें शामिल हैं। 1844 की ट्रीटी ऑफ वांगशिया जैसे पुराने दस्तावेज भी मौजूद हैं, जो अमेरिका और चीन के शुरुआती राजनयिक संबंधों से जुड़े हैं।

Updated on:
25 Sept 2026 04:41 pm
Published on:
25 Sept 2026 04:41 pm