
Saudi Arabia Missile Attack: यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य गतिविधियां तेज होती दिख रही हैं। यमन के दक्षिणी इलाके ताइज में सरकारी फौज ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए हूती विद्रोहियों को पीछे खदेड़ दिया है। यमनी सेना ने 'जबल बाजेल' नाम की एक बेहद जरूरी और ऊंची पहाड़ी पर दोबारा अपना कब्जा जमा लिया है। इस पहाड़ी पर कब्जा होने से अब यमनी सेना हूती विद्रोहियों के हथियारों और राशन पहुंचाने वाले रास्तों पर आसानी से नजर रख सकती है और उन्हें निशाना बना सकती है।
इस बड़ी कामयाबी के बाद प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के अध्यक्ष राशद अल-अलीमी का महत्वपूर्ण वक्तव्य सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यमनी बलों ने अपनी खोई हुई सामरिक क्षमता और प्रतिरोधक शक्ति को पूरी तरह पुनर्स्थापित कर लिया है तथा सेना संपूर्ण देश पर वैध नियंत्रण बहाल करने में समर्थ है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी भी जारी की कि जब तक हूती गुट को हथियारों की आपूर्ति मिलती रहेगी, तब तक आगे भी गंभीर सैन्य अभियानों की आशंका बनी रहेगी।
जमीन पर मिली हार से बौखलाए हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर हमले शुरू कर दिए। विद्रोहियों ने सऊदी अरब के दो बड़े शहरोंरियाद और खमीस मुशैत को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दागे। हालांकि, सऊदी अरब के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय सैन्य गठबंधन की मुस्तैद वायु रक्षा प्रणाली ने समय रहते इन सभी हवाई खतरों को बीच रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर पूरी तरह नष्ट कर दिया। गठबंधन के आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार, रियाद की ओर तेजी से बढ़ रहे दो हूती ड्रोन को सीमा के भीतर प्रवेश से पूर्व ही मार गिराया गया, जबकि खमीस मुशैत शहर को निशाना बनाकर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को भी हवा में ही खत्म कर दिया गया।
सऊदी अरब पर हुए इन हमलों पर गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) ने सख्त ऐतराज जताया है। संगठन के महासचिव जसीम मोहम्मद अल-बुदैवी ने हूती कृत्यों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि जीसीसी संकट की इस घड़ी में सऊदी अरब की संप्रभुता, सुरक्षा और प्रादेशिक अखंडता की रक्षा हेतु उसके द्वारा उठाए जाने वाले प्रत्येक कदम का पूर्ण समर्थन करता है। इसके अलावा उन्होंने वैश्विक समुदाय से हूतियों की मनमानी पर विराम लगाने और उन्हें उनके कृत्यों के लिए जिम्मेदार ठहराने हेतु कड़े अंतरराष्ट्रीय उपाय लागू करने का आग्रह किया है।
एक तरफ मोर्चे पर गोलाबारी जारी है, तो दूसरी तरफ ताइज शहर में रहने वाले आम लोगों की जिंदगी नर्क बन गई है। युद्ध और भुखमरी की वजह से यहां के लोग दाने-दाने को मोहताज हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार ताइज़ में इस समय 83 हजार से ज्यादा लोग अपना घर-बार छोड़कर भागने पर मजबूर हुए हैं, जिनमें करीब 11 हजार परिवार शामिल हैं। पानी की पाइपलाइन टूटने की वजह से लोगों को महंगे टैंकरों से पानी खरीदना पड़ रहा है। पूरे शहर में बिजली ठप है, जिससे लोग सोलर लाइट के भरोसे दिन काट रहे हैं। इसके साथ ही आवास की भारी किल्लत और भारी किराए के कारण एक-एक भीड़भाड़ वाले अपार्टमेंट में छह से आठ विस्थापित परिवार एक साथ रहने को विवश हैं।