
Yemen Houthi Conflict: तेल और गैस संपदा से समृद्ध यमन के प्रमुख शहर मारिब में एक बार फिर बारूदी गूंज सुनाई दे रही है। हूती विद्रोही गुट ने निर्दोष नागरिकों और विस्थापितों के शिविरों को निशाना बनाकर भीषण बैलिस्टिक मिसाइल व ड्रोन हमले किए हैं। इस खूनी दुस्साहस में कई बेकस जानों का नुकसान हुआ है और दर्जनों घायल हुए हैं। इसके जवाब में यमनी सेना ने राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी मोर्चों पर एकीकृत कार्रवाई का एलान करते हुए खुली जंग की चेतावनी दी है।
गृहयुद्ध की त्रासदी झेल रहे यमन में हालात एक बार फिर बेकाबू होते नजर आ रहे हैं। यमन के सुरक्षा बलों ने आधिकारिक बयान जारी कर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों पर मारिब शहर की घनी आबादी वाले मोहल्लों और शरणार्थी कैंपों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का गंभीर आरोप लगाया है। अचानक हुए इन हमलों से शहर में दहशत का माहौल है।
हालिया हमलों में 2 लोगों के मारे जाने और कम से कम 14 अन्य के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि हुई है। मिसाइल और ड्रोन की इस संयुक्त बौछार ने उन लाचार विस्थापितों के आशियानों को भी निशाना बनाया, जो पहले ही देश के अन्य हिस्सों से विस्थापित होकर यहां पनाह लिए हुए थे।
हमले की गंभीरता को देखते हुए यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के वरिष्ठ सदस्य मेजर जनरल सुल्तान बिन अली अल-अर्रदाह ने उच्चस्तरीय सैन्य व सुरक्षा समिति के साथ आपात बैठक की अध्यक्षता की। इस उच्चस्तरीय मंथन में जनरल स्टाफ चीफ लेफ्टिनेंट जनरल सगीर बिन अजीज भी मौजूद रहे। बैठक में स्पष्ट किया गया कि हूतियों के इस हमले का जवाब सेना अपनी शर्तों पर "उचित समय और स्थान" पर देगी।
हमले के तुरंत बाद यमनी सेना ने मारिब और हद्रामौत गवर्नरेट में हूती ठिकानों पर व्यापक जवाबी अभियान शुरू कर दिया है। सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित संदेश में यमनी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता कर्नल माजेद अल-नुजैली ने कहा कि यह कार्रवाई सेना और निहत्थे नागरिकों की हिफाजत के वैध अधिकार के तहत की गई है।
प्रवक्ता ने सख्त लहजे में आगाह किया कि हूती चरमपंथी किसी एक मोर्चे को निशाना बनाएंगे, तो उसे पूरी यमनी सेना पर हमला माना जाएगा। उन्होंने यमन के कबीलों और आम नागरिकों से अपील की कि वे देश के संसाधनों को लूटने वाली और विदेशी एजेंडे पर काम करने वाली विद्रोही ताकतों के खिलाफ सरकार के साथ एकजुट हों।
ऊर्जा का केंद्र: मारिब प्रांत यमन की तेल और प्राकृतिक गैस का प्रमुख केंद्र है। यहां स्थित रिफाइनरी और गैस पाइपलाइन देश की आर्थिक रीढ़ हैं, जिस पर नियंत्रण के लिए हूती विद्रोही वर्षों से आमादा हैं।
विस्थापितों की अंतिम पनाहगाह: 2014 में सना पर हूती कब्जे के बाद से लाखों यमनी नागरिकों ने मारिब में शरण ली थी। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, यहां 20 लाख से अधिक विस्थापित नागरिक रहते हैं, जिससे यहां सैन्य हमलों का मानवीय असर बेहद विनाशकारी होता है।
क्षेत्रीय टकराव और रेड सी संकट: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार और हूती विद्रोहियों के बीच यह टकराव केवल स्थानीय नहीं है। लाल सागर में हूतियों द्वारा जहाजों पर किए जा रहे हमलों के बीच जमीनी मोर्चों पर भड़की यह नई हिंसा पूरे मध्य-पूर्व में तनाव को और गहरा कर सकती है।
सेना की आक्रामक जवाबी तैयारियों से साफ संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष और भीषण रूप अख्तियार कर सकता है।