
Russia-Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक कोशिशें तेज हो गई हैं। युद्ध खत्म करने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का बड़ा बयान सामने आया है। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन ने हमेशा शांति की वकालत की है और अगर रूस यूक्रेन के एनर्जी सेक्टर, जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और अनाज के निर्यात को निशाना बनाना बंद कर दे, तो यूक्रेन तनाव कम करने की दिशा में जवाबी कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किये एक पोस्ट में राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन के खिलाफ रूस का युद्ध समझदारी और इंसानियत के खिलाफ है और इसे खत्म होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यूक्रेन ने पहले दिन से ही शांति की कोशिश की है और युद्ध को सम्मान के साथ खत्म करने, सुरक्षा की गारंटी पाने और भविष्य में रूसी आक्रामकता को रोकने के मकसद से दर्जनों कूटनीतिक प्रस्ताव रखे हैं।
जेलेंस्की ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका के साथ अभी बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि शांति की ओर बढ़ने और तनाव कम करने के लिए ठोस कदम उठाने के मकसद से अभी कई प्रस्तावों पर चर्चा हो रही है। जेलेंस्की ने आगे कहा कि यूक्रेन न्यूयॉर्क में यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली (UNGA) के दौरान अपने सहयोगियों के साथ इस एक्शन प्लान पर विस्तार से चर्चा करने जा रहा है।
रूसी हमलों का जवाब देने की यूक्रेन की क्षमता पर जेलेंस्की ने कहा कि वह दौर अब बीत चुका है जब हमले में सिर्फ पीड़ित पक्ष को ही नुकसान होता था। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी की वजह से युद्ध का स्वरूप बदल गया है और अब हमलावर को भी बराबर के नतीजे भुगतने पड़ते हैं। उन्होंने देकर कहा कि दुनिया के नेताओं की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति ही तनाव कम कर सकती है और सुरक्षा व शांति कायम कर सकती है।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर युद्ध को लेकर एक पोस्ट किया था। ट्रंप ने लिखा कि यूक्रेन में चल रहे युद्ध की वजह से रूस का अपनी डीजल तेल इंडस्ट्री पर से कंट्रोल खो दिया है और उसकी कई रिफाइनरियां बर्बाद हो गई हैं। ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन के साथ यह बेतुका और कभी न खत्म होने वाला युद्ध अब रुकना चाहिए। पूरी दुनिया इसका खामियाजा भुगत रही है। उन्होंने कहा कि उस युद्ध में हर महीने 25,000 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।