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अमरोहा कोर्ट का सख्त रुख: 15 साल पुराने केस में बड़ा फैसला, जाली नोट मामले में आरोपी को 10 साल कैद

Amroha News: अमरोहा की अदालत ने 15 साल पुराने नकली नोट मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई। जमानत पर चल रहा आरोपी फैसला आते ही हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया।

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अमरोहा कोर्ट का सख्त रुख..

Fake Currency Case Amroha: अमरोहा की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय की अदालत ने नकली नोट चलाने के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए रामपुर निवासी मशरूर को दोषी ठहराया है। अदालत ने आरोपी को 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई, साथ ही उस पर एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। फैसले के बाद न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया कि नकली मुद्रा जैसे अपराधों के प्रति कानून का रुख बेहद सख्त है।

15 साल बाद आया न्याय

यह मामला करीब 15 साल पुराना है, जिसमें आरोपी लंबे समय से जमानत पर चल रहा था। जैसे ही अदालत ने उसे दोषी करार दिया, तुरंत उसे हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। इस फैसले ने यह संदेश दिया कि चाहे मामला कितना भी पुराना क्यों न हो, कानून अपना काम जरूर करता है।

घटना की पूरी कहानी

अभियोजन के अनुसार, यह घटना 13 जून 2011 की है, जब तत्कालीन दरोगा वीआर विक्रम अपनी मोबाइल ड्यूटी पर कांस्टेबल योगेंद्र सिंह और रामनिवास शर्मा के साथ बिजलीघर चौराहे पर तैनात थे। इसी दौरान उन्हें एक अहम सूचना मिली, जिसने पूरे मामले को उजागर कर दिया।

मुखबिर की सूचना से खुला राज

पुलिस को एक मुखबिर के जरिए जानकारी मिली कि एक व्यक्ति मीट की दुकान पर नकली नोट चलाने की कोशिश में खड़ा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बिना देरी किए संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ लिया। इस त्वरित कार्रवाई ने एक बड़े फर्जीवाड़े को सामने ला दिया।

तलाशी में बरामद हुए संदिग्ध नोट

पुलिस द्वारा आरोपी की तलाशी लेने पर उसके पास से एक हजार रुपये के तीन नोट बरामद हुए। इनमें से दो नोट प्रथम दृष्टया ही संदिग्ध लगे। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम मशरूर निवासी सेंडोवाला, थाना टांडा, जिला रामपुर बताया, जिससे पुलिस को आगे की जांच में मदद मिली।

बैंक जांच में पुष्टि हुई जालसाजी

बरामद नोटों को जांच के लिए स्टेट बैंक भेजा गया, जहां बैंक कर्मियों ने जांच के बाद पुष्टि की कि नोट जाली हैं। इस वैज्ञानिक जांच ने अभियोजन के पक्ष को और मजबूत बना दिया और अदालत के सामने पुख्ता सबूत प्रस्तुत किए गए।

दोनों पक्षों की दलीलों के बाद फैसला

अदालत में लंबी सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। अभियोजन ने सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी साबित किया, जबकि बचाव पक्ष अपनी दलीलों से आरोपी को निर्दोष साबित करने में असफल रहा। अंततः न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए 10 साल की सजा सुनाई।

कानून का सख्त संदेश

इस फैसले के साथ ही अदालत ने साफ कर दिया कि नकली नोट चलाने जैसे अपराध समाज और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए गंभीर खतरा हैं। ऐसे मामलों में सख्त सजा देकर न्यायालय ने अपराधियों को कड़ा संदेश दिया है कि कानून से बच पाना संभव नहीं है।