
ब्रह्म मुहूर्त से गूंजे हर-हर गंगे के जयकारे | Image Credit : Getty
Paush purnima ganga snan amroha: यूपी के अमरोहा में पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर शनिवार तड़के ब्रजघाट और तिगरी गंगा धाम में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने ब्रह्म मुहूर्त में मोक्षदायिनी गंगा में स्नान कर सूर्य देव को अर्ध्य अर्पित किया। इसके बाद ब्राह्मणों और गरीब-निराश्रितों को तिल, गुड़, कंबल और ऊनी वस्त्रों का दान कर पुण्य अर्जित किया। धार्मिक आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा, जबकि सुरक्षा के मद्देनज़र अमरोहा पुलिस पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दी।
पौष पूर्णिमा के गंगा स्नान को लेकर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से श्रद्धालु शुक्रवार शाम से ही ब्रजघाट और तिगरी गंगा धाम पहुंचने लगे थे। देर रात से ही घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई, जिससे तीर्थनगरी में चहल-पहल और बाजारों में विशेष रौनक देखने को मिली। श्रद्धालु धार्मिक सामग्री, दान-पुण्य के लिए वस्त्र और पूजा-सामग्री की खरीदारी करते नजर आए।
शनिवार सुबह करीब चार बजे ब्रह्म मुहूर्त में श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान प्रारंभ कर दिया था। तिगरी गंगा घाट पर गजरौला नगर और आसपास के दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। सुबह दस बजे तक ब्रजघाट और तिगरी गंगा धाम में 25 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि पौष पूर्णिमा पर गंगा स्नान और दान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, बुलंदशहर और मुरादाबाद जैसे बड़े शहरों से आए श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद ब्राह्मणों और गरीब-निराश्रितों को भोजन और वस्त्र दान किए। कई श्रद्धालुओं ने जरूरतमंदों को कंबल और ऊनी कपड़े देकर मानव सेवा का संदेश दिया। श्रद्धालुओं का कहना था कि पौष पूर्णिमा पर किया गया दान कई गुना पुण्य प्रदान करता है।
तिगरी गंगा धाम के पंडित गंगा शरण शर्मा ने बताया कि पौष पूर्णिमा के साथ ही माघ स्नान पर्व का भी शुभारंभ हो गया है, जो पूरे एक माह तक चलेगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान सूर्योदय से पूर्व गंगा स्नान कर गरीब-निराश्रितों को भोजन, वस्त्र, लकड़ी और तिल का दान तथा ब्राह्मणों को दक्षिणा देने से व्यक्ति पापों से मुक्त होकर मनोवांछित फल प्राप्त करता है।
पंडित गंगा शरण शर्मा ने माघ माह में पितरों के श्राद्ध, प्रयाग में कल्पवास, त्रिवेणी में स्नान और गढ़-ब्रजघाट व तिगरी गंगा धाम में दान-पुण्य के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि माघ माह में श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए धार्मिक कर्मों से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति के साथ पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
Published on:
03 Jan 2026 01:30 pm
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