
कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिली आतंकी धमकी पर भड़के फारूक अब्दुल्ला, फोटो सोर्स- ANI
Farooq Abdullah on Kashmiri Pandit threats: जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने घाटी में कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिली हालिया आतंकी धमकियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा है कि इस मामले में कुछ 'संदिग्ध' (fishy) लगता है। धमकियों के बाद बढ़े सुरक्षा खतरों को देखते हुए प्रशासन ने सैकड़ों कश्मीरी पंडितों और अन्य अल्पसंख्यक कर्मचारियों को प्रशासनिक छुट्टी पर भेज दिया है।
मीडिया से बात करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीर में विभिन्न धर्मों के लोग एक साथ रहते और काम करते हैं, फिर केवल एक समुदाय को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? उन्होंने कहा कि जब कश्मीर में इतने सारे लोग रहते हैं, तो सिर्फ कश्मीरी पंडितों को चुन-चुनकर धमकियां क्यों दी जा रही हैं? गृह मंत्रालय को इसकी जांच करनी चाहिए। सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके धमकियां देने वाले ये लोग कौन हैं? मुझे लगता है कि दाल में कुछ काला है और एमएचए को इसकी गहराई से जांच करनी चाहिए।
पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैया (LeT) से जुड़े एक समूह द्वारा जारी किए गए कथित धमकी भरे पत्र के बाद हड़कंप मच गया है। इस पत्र में कुछ कर्मचारियों के नाम और उनके संपर्क विवरण तक दर्ज थे। 25 अगस्त तक सैकड़ों कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को प्रशासनिक अवकाश पर भेज दिया गया है।
प्रधानमंत्री विशेष रोजगार पैकेज (PM Special Employment Package) के तहत तैनात कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। जिन कर्मचारियों के नाम धमकी भरे पत्र में थे, उन्हें सुरक्षित रूप से जम्मू शिफ्ट कर दिया गया है। कश्मीरी पंडित कर्मचारी अमित कौल ने बताया कि पुलिस ने उन्हें काम पर न जाने और घाटी में रह रहे लोगों को घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2010 में विस्थापित कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए शुरू किए गए पीएम पैकेज के तहत लगभग 6,000 कश्मीरी पंडितों को सरकारी नौकरियां दी गई थीं। 2022 में आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाकर कई हमले किए थे, जिनमें 5 कर्मचारियों की मौत हो गई थी। इसके बाद कर्मचारियों ने जम्मू ट्रांसफर की मांग को लेकर महीनों विरोध प्रदर्शन किया था।
घाटी में हाल के दिनों में सुरक्षा स्थितियां फिर तनावपूर्ण हुई हैं। 22 जुलाई को अनंतनाग में एक पुलिसकर्मी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जबकि कुलगाम में दो प्रवासी मजदूरों की जान चली गई थी। सुरक्षा कारणों और मौसम के चलते इस साल 3 जुलाई से शुरू हुई अमरनाथ यात्रा को 9 अगस्त से ही स्थगित और समय से पहले समाप्त कर दिया गया।
सुरक्षा बलों का कहना है कि वे धमकियों की गंभीरता से जांच कर रहे हैं और सभी कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
Updated on:
14 Aug 2026 04:51 pm
Published on:
14 Aug 2026 04:51 pm
