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अमरकंटक में ज्वालेश्वर के पास पांच दिन से बाघिन का डेरा, मवेशियों का कर रही शिकार

अमरकंटक, अमरकंटक वन परिक्षेत्र के ज्वालेश्वर के जंगलों में एक बाघिन ने बीते पांच दिनों से डेरा डाल रखा है जिससे आसपास के ग्रामीणों में भय और दहशत का माहौल व्याप्त है। बाघिन न केवल जंगलों में विचरण कर रही है बल्कि अब रिहायशी इलाकों की ओर भी रुख कर रही है। ज्वालेश्वर और अमरेश्वर […]

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अमरकंटक, अमरकंटक वन परिक्षेत्र के ज्वालेश्वर के जंगलों में एक बाघिन ने बीते पांच दिनों से डेरा डाल रखा है जिससे आसपास के ग्रामीणों में भय और दहशत का माहौल व्याप्त है। बाघिन न केवल जंगलों में विचरण कर रही है बल्कि अब रिहायशी इलाकों की ओर भी रुख कर रही है। ज्वालेश्वर और अमरेश्वर मंदिर के पास के क्षेत्रों में ग्रामीणों ने इसे कई बार देखा है। ग्रामीणों ने बताया कि पहले बाघिन केवल जंगल के भीतर ही सक्रिय थी, लेकिन अब उसने मवेशियों का शिकार शुरू कर दिया है। बाघिन को शाम के वक्त ज्वालेश्वर के रास्ते पर देखा गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वन विभाग ने जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो यह स्थिति और भी खतरनाक हो सकती है। लोगों को डर है कि बाघिन रिहायशी इलाकों में घुसकर हिंसक हो सकती है जिससे जनहानि का खतरा पैदा हो सकता है। ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। बाघिन को जंगल से दूर हटाने और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने किसी प्रकार की योजना नहीं बनाई गई है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर आक्रोश भी है। ज्वालेश्वर और अमरेश्वर के आसपास के गांवों के लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। कई परिवारों ने अपने बच्चों और बुजुर्गों को घरों से बाहर जाने पर रोक लगा दी है। वहीं मवेशियों को लेकर भी खासा डर बना हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से गुहार लगाई है कि बाघिन को जल्द से जल्द जंगल में सुरक्षित तरीके से वापस भेजा जाए और उनकी सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए जाएं। वन विभाग से उम्मीद की जा रही है कि वह विशेषज्ञों की मदद से इस समस्या का समाधान करे ताकि क्षेत्र के लोगों को राहत मिल सके।

इधर, हाथियों का उत्पात नहीं थम रहा, तुलरा में छह मकानों में की तोडफ़ोड़

अनूपपुर. जिले के जैतहरी, अनूपपुर एवं पुष्पराजगढ़ तहसील में निरंतर विचरण कर रहे हाथी वन परिक्षेत्र राजेंद्रग्राम अंतर्गत ग्राम तुलरा में बिरासिनी देवी मंदिर के पास दो दिन से डेरा जमाए हैं। मंगलवार एवं बुधवार की मध्य रात्रि तुलरा, पाखाटोला गांव में 6 ग्रामीणों के घरों में तोडफ़ोड़ कर एक किसान के खेत में लगी गेहूं की फसल को अपना आहार बनाया है। बताया जाता है कि गोपाल पिता नन्हू सिंह, वीर सिंह पिता बैसाखू सिंह, नानू पिता अल्लू बनवासी, कांशीराम वनवासी, गोविंदलाल वनवासी, भागवत वनवासी के मकान में तोडफ़ोड़ की है। वहीं सनत सिंह के खेत में गेहूं की फसल को अपना आहार बनाया है। दोनों हाथी लगभग 5 किलोमीटर का सफर तय करने बाद बुधवार की सुबह वापस मंदिर के पास के जंगल में पहुंच गए। ग्रामीणों को दौड़ाया विगत रात ग्रामीणों ने अपने गांव, मोहल्ला में हाथियों को प्रवेश करने से रोकने के उद्देश्य से हाथियों को भगखने की कोशिश की जिससे गुस्साए हाथियों ने कई बार ग्रामीणों को दौड़ाया। हाथियों पर वनविभाग का गश्ती दल, पुलिस दल निरंतर नजर बनाए हुए है। हाथियों के संभावित विचरण क्षेत्र पर हाथियों की सुरक्षा को देखते हुए विद्युत लाइन बंद रखी जा रही है। तत्काल हो रहा सर्वे कलेक्टर के निर्देश पर संबंधित तहसीलदार एवं पटवारियों द्वारा हाथियों द्वारा किए जा रहे नुकसान का तत्काल सर्वेक्षण कर राहत प्रकरण तैयार किया जा रहा है। 24 दिसंबर से 17 जनवरी के मध्य हाथियों द्वारा जैतहरी, अनूपपुर एवं पुष्पराजगढ़ तहसीलों में किए गए नुकसान का भुगतान संबंधित के खाते में किया जा चुका है। राहत प्रकरण तैयार किया जा रहा है।