
२० नलजल योजनाएं सहित ३०० से अधिक हैंडपम्प बंद, गांवों में पानी के लिए मच रही हाहाकार
सरकार की बेरूखी पर पीएचई उपयंत्रियों ने ग्राम पंचायत की नलजल योजनाओं के सुधार से किया इंकार
अनूपपुर। ग्रीष्मकाल के दौरान जलसंकट से प्रभावित ग्रामों में जलापूर्ति व्यवस्था बनाने के सम्बंध में विभागाधिकारियों को शासन और प्रशासन द्वारा जारी किए गए आदेश अब हवा-हवाई हो गई है। जिले में जलसंकट प्रभावित गांवों के सर्वेक्षण के साथ जलापूर्ति की व्यवस्थाओं की बजाय पीएचई विभाग के समस्त उपयंत्री सवंर्ग के सदस्य अपनी ५ सूत्री मांगों को लेकर २मई से अनिश्चिकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं। जिसके कारण जिले के चारों विकासखंडों में २० नलजल योजना सहित ३०० से अधिक हैंडपम्प मेंटनेंश के अभाव में बंद हो गए या पानी नहीं उगल रहे हैं। हालंाकि पीएचई विभाग खुद गर्मी के दिनों में गिरने वाली जलस्तर में २० नलजल योजनाओं सहित लगभग ५०० हैंडपम्पों को बंद होने की बात मान जा रही है। उनका कहना है कि मजदूर या ठेकेदार बोर करते जरूर है लेकिन तकनीकि रूप में लम्बे समय तक इस्तेमाल के लिए उपयंत्री ही उसकी मॉनीटरिंग करते हैं। बहरहाल उपयंत्रियों की अनिश्चिकालीन हड़ताल पर चले जाने के कारण अनूपपुर जिले के अधिकांश ग्रामीण अचंल जलसंकट की समस्या से जूझ रही है। अनूपपुर, कोतमा, जैतहरी तथा पुष्पराजगढ़ के पठारी क्षेत्र में निवासरत लोग बूंद-बूंद पानी के लिए ग्रामीण तरस रहे हैं। ग्रामीण पानी के अभाव में तालाब, झिरिया, नाला सहित दूर-दराज के जलस्त्रोत से पानी लाकर अपनी दैनिक जरूरतें पूरी कर रहे हैं। इनमें अनूपपुर के पडौर, पयारी, लतार, क्योंटार, आमाडांड क्षेत्र, राजनगर, रामनगर, जैतहरी ग्रामीण अंचल सहित पुष्पराजगढ़ के बड़ी तुम्मी सहित पड़मनिया, गिरारी, तथा छोटी तुम्मी जैसे सुदूरीय ग्राम पानी के लिए त्राहि-त्राहि हुए हैं। बावजूद जिला प्रशासन द्वारा जलसंकट से प्रभावित गांवों के सम्बंध में नहीं तो सर्वे कराया गया है और ना ही बंद पड़े नलजल योजनाओं को चालू कराने की पहल कराई जा रही है। वहीं पीएचई के उपयंत्रियों ने ग्राम पंचायतों को हैंडओवर कराए गए अब नलजल योजनाओं को चालू कराने से इंकार कर दिया है। उपयंत्रियों का कहना है कि अधिकांश ग्राम पंचायतों में स्थापित नलजल योजनाओं को ग्राम पंचायतों द्वारा चलाया ही नहीं जाता है। वहीं बिजली सम्बंधी या अन्य तकनीकि खामियों में बिना सूचना दिए छोड़ दिया जाता है। जबकि हैंडओवर के उपरांत सारी प्रक्रिया ग्राम पंचायतों के माध्यम से पूरा किया जाना होता है।
विभागीय जानकारी के अनुसार अनूपपुर जिले के दो विकासखंड जैतहरी और कोतमा में ठेकेदारी व्यवस्था के तहत हैंडपम्प और नलजल योजनाओं का कार्य कराया जाता है। लेकिन अनूपपुर और पुष्पराजगढ़ में ठेकेदारी व्यवस्था नहीं अपनाई गई है। जिसके कारण इन क्षेत्रों में उपयंत्रियों की मदद से ही बोर और सुधार कार्य कराए जाते हैं। लेकिन विभाग का यह भी मानना है कि जिन विकासखंडों में ठेकेदारी व्यवस्था है वहां भी बिना उपयंत्री की अनुमति बोर और सुधार कार्य नहीं कराए जाते। क्योंकि सुधार के दौरान उपयंत्री का रहना अनिवार्य होता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले में ९२९८ हैंडपम्प और १७६ नलजल योजनाएं लगाई गई है। जिसमें लगभग पांच सैकड़ा हैंडपम्प बंद तथा २० से अधिक नलजल योजनाएं विभिन्न कारणों से बंद पड़ी है।
बॉक्स: कहां कितने हैंडपम्प
कुल स्थापित हैंडपम्प- ९२९८
चालू हैंडपम्पों की संख्या- ८९९८
बंद हैंडपम्पों की संख्या-३००
मुख्यमंत्री नलजल योजनाएं- १७६
चालू/ बंद योजनाएं - १५६ चालू तथा २० बंद
वर्सन:
जिले के समस्त उपयंत्री अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। ग्रामीण अंचलों में पानी की समस्या बन रही है, लेकिन सुधार उपयंत्री के बिना सम्भव नहीं। दो विकासखंडों में ठेकेदारी व्यवस्था है, शेष दो में विभागीय अधिकारी द्वारा ही बोर और सुधार कार्य कराए जाते हैं।
एचएस धुर्वे, कार्यपालन यंत्री पीएचई अनूपपुर।
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Published on:
12 May 2018 08:21 pm

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