
सीतापुर खदान बंद, रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन जारी
बॉक्स: ग्राम पंचायत ने रेत परिवहन लगाएं आवेदन
अनूपपुर। पर्यावरणीय सुरक्षाओं में वर्ष २०१५ में राजस्व विभाग और वनविभाग द्वारा नहीं भेजी गई रिपोर्ट उपरांत अनूपपुर मुख्यालय की सीतापुर रेत खदान को बंद कराने के जारी आदेश के बाद भी पिछले दो सालों से रात के अंधियारे में रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन जारी है। जहां रात के मध्य निजी जमीन के रास्ते भारी वाहन सोननदी तट पर बेधडक़ उतर रेत भराव कर आसानी से नगरीय क्षेत्र से गुजर रहा है। रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन पर स्थानीय ग्रामीणों सहित मीडिया द्वारा शिकायत के माध्यम से जिला प्रशासन सहित पुलिस प्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया गया। बावजूद अब पुलिस के सरंक्षण में भारी वाहनों का सोननदी किनारे उतरने तथा रेत का परिवहन करने का सिलसिला बना हुआ है। हालात यह बन गए हैं कि पिछले दो सालों में बारिश सीजन के उपरांत सीतापुर रेत खदान पर जमने वाली ३-५ फीट मोटी रेत का उठाव बिना किसी ठेकेदारी व्यवस्था के अवैध रेत उत्खनन और परिवहन में खप गई। नदी से रेत खनन के निशान अब भी बने हुए हैं। यहीं नहीं नदी तट की बहती जलधारा को भी जेसीबी मशीनों के माध्यम से खोद धारा की दिशा बदल वहां से रेत उत्खनन का कार्य किया जा रहा है। जबकि रेत परिवहन की सुविधाओं में माफियाओं ने मुख्य मार्ग से नदीतट तक जेसीबी से अस्थायी मार्ग का भी निर्माण करवा दिया है, ताकि भारी वाहनों सहित छोटे वाहनों की आसानी से आवाजाही हो सके। आश्चर्य है कि यह सब जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय से आधा किलोमीटर दूर सोननदी के पूर्वी छोर पर हो रहा है। लेकिन आजतक प्रशासनिक अधिकारियों ने नदीघाट का जायजा तक नहीं लिया। खनिज विभाग का कहना है कि उनके पास अमले की कमी है तथा रात के दौरान बिना अधिकारी कैसे कार्रवाई की जाए। सूत्रों के अनुसार रेत उत्खनन का कारोबार गांव के कुछ रसूखदार लोगों को पुलिस सरंक्षण मिला हुआ है, यह रसूखदार पूरी रात सोन का सीना छलनी कर रेत का अवैध परिवहन में जुटे रहते हैं। वहीं पुलिस भी नगर से गुजरने वाले ऐसे चिह्नित वाहनों को बेरोकटोक आवाजाही की इजाजत दे देती है।
उल्लेखनीय है कि जिला मुख्यालय अनूपपुर के मध्य से बहने वाली सोननदी की सीतापुर रेत खदान सबसे पुरानी रेत खदान हैं, जहां लगभग २ हेक्टेयर भूमि शासकीय स्तर पर लीज में दी जाती रही है। सीतापुर के बाद मानपुर और उसके बाद चचाई रेत खदान सबसे बड़ी रेत खदान मानी जाती है। लेकिन वर्ष २०१५ में खदान लीज में राजस्व और वनविभाग ने रिपोर्ट नहीं भेजी। वहीं एनजीटी के नए आदेश में ५ हेक्टेयर से कम रकबे वाले रेत खदानों को लीज पर देने से मनाही कर दी गई। जिसके उपरांत सीतापुर रेत खदान बंद हो गया। लेकिन बंद रेत खदान के बाद भी रात के दौरान रेत माफियाओं ने रेत का उत्खनन और परिवहन जारी रखा। खनिज विभाग का कहना है कि ग्राम पंचायत द्वारा सीतापुर रेत खदान से रेत उत्खनन और परिवहन का आवेदन विभाग में लगाया गया है। लेकिन अबतक राजस्व और वनविभाग ने अनुमति नहीं दी है।
बॉक्स: शिकायतों पर दर्जना डम्फर हुए थे जब्त
अवैध रेत परिवहन पर मार्च माह के दौरान जिला प्रशासन के निर्देश में खनिज विभाग ने कलेक्ट्रेट आवासीय परिसर के सामने ही तीन दिनों लगभग दर्जन से अधिक डम्फरों को जब्त करने की कार्रवाई की थी। इसके बाद दो-चार वाहनों के जब्त होने का सिलसिला बना रहा। यह कार्रवाई बताती है कि सीतापुर और मानपुर जैसे रेत खदानों से रेत के अवैध परिवहन हो रहे हैं।
वर्सन:
इस सम्बंध में हमने खनिज विभाग को रेत के अवैध परिवहन बंद कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही एसडीएम को मामले की जांच का निर्देश दिया है। जैसा रिपोर्ट आएगा उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. आरपी तिवारी, अपर कलेक्टर अनूपपुर।
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दोनों पक्षों के बीच जमीनी मामला चल रहा है। रात के दौरान हुए विवाद में दोनों पक्षों को शांति बनाए रखने की समझाईश दी गई है। साथ ही मामले की जांच कराई जा रही है।
हितेश चौधरी, पुलिस अधीक्षक अनूपपुर।
Published on:
11 May 2018 09:30 pm
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