
Dogs make up 913 people
अनूपपुर. जिलेभर में आवारा धूमने वालों कुत्तों ने अपना आंतक मचा रखा है, जिसमें पिछले एक साल में आवारा कुत्तों ने लगभग ९ सैकड़ा से अधिक लोगों को अपना शिकार बनाया है। इनमें रोजना २-३ लोग प्रतिदिन उपचार कराने जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। लेकिन लगातार कुत्तों के काटने के शिकार आ रहे मामले तथा नगरपालिकाओं में नगरवासियों द्वारा दर्ज कराई जा रही शिकायतों के बाद भी इससे बचाव के लिए नगरपालिका सहित ग्राम पंचायतों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। हालांकि नगरपालिका यह मानती है कि उनके नगरीय क्षेत्र में अधिक संख्या में आवारा कुत्तों के काटने के शिकार नगरवासी बन रहे हैं। लेकिन इस सम्बंध में नगरपालिका द्वारा अबतक उनके नसबंदी या फिर पकडऩे जैसी व्यवस्था नहीं अपना सकी है। जिसके कारण वर्ष २०१७ में कुल ९१३ लोग उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती हुए। आवारा कुत्तों का आंतक सबसे ज्यादा नगरपालिका अनूपपुर, बिजुरी, कोतमा, भालूमाड़ा, जैतहरी तथा पुष्पराजगढ़ क्षेत्रों में बने हुए हैं। आदिवासी अंचल होने के कारण इतने वृहत जगहों में अमूनन हजारों की संख्या में आवारा कुत्ते धूमते नजर आते हैं, जहां थोड़ी से नजर बचते ही लोग उनके शिकार बन जाते हैं। आंकड़ों को देखा जाए तो किसी किसी महीने ९५ से ११० तक लोग इनके शिकार बने हैं।
बताया जाता है कि जिला अस्पताल सहित जिले के ७ अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर कुत्तों से बचाव के लिए रेैबीज के इंजेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। लेकिन नगरपालिका अनूपपुर, कोतमा, बिजुरी, अमरकंटक, पसान सहित नगरपंचायत जैतहरी में इन आवारा कुत्तों से बचाव के लिए परिषदों ने कोई ठोस रणनीति भी नहीं बनाई है। ऐसे आवारा कुत्तों को पकडऩे के लिए भी डॉग कैचर तक नहीं उपलब्ध है। नगरपालिका सूत्रों के अनुसार इस सम्बंध में अबतक नगरीय प्रशासन ने उपसंचालक पशु चिकित्सा अधिकारी से आवारा कुत्तों से बचाव के लिए किसी बात पर राय या चर्चा नहीं की है। जबकि प्रावधानों के तहत अगर पशुपालन विभाग द्वारा उसका नसबंदी किया जाता है कि आगामी ६ दिनों तक कुत्तों की देख-रेख की जिम्मेदारी नगरपालिका द्वारा पूरी की जाती है। लेकिन नगरपालिका के पास काउ कैचर हाका गैंग तक अभाव है तो डॉग कैचर कहां से बनाए। जबकि पूर्व में आवारा कुत्तों से मुक्ति पाने शासन ने कुत्तों को पकड़े तथा नसबंदी करने सहित अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को अपनाने के निर्देश दिए थे। जहां ऐसे आवारा कुत्तों के रैबीज इंफेक्शन से बचाने पशुपालन विभाग द्वारा भी इन्हें इंजेक्शन नहीं लगाए जा रहे हैं। यहीं नहीं इनमें पागल होने वाले कुत्तो की पहचान करने सहित उसे मारने की भी व्यवस्था नहीं अपनाया जा रहा है, जिसके कारण कभी भी किसी हालात में कुत्तों के शिकार बने व्यक्ति में जल्द ही रैबीज का इंफेक्शन हो जाता है।
इनका कहना है
इस सम्बंध में अबतक आवारा कुत्तों से बचाव के लिए कोई कार्ययोजना नहीं बनी है, लेकिन यह सच है कि आवारा कुत्तों के आंतक में प्रतिमाह सैकड़ों की तादाद में लोग जख्मी हो रहे हैं। परिषद में इसपर प्रस्ताव बनाकर जल्द ही कुत्तों से निजात पाने कार्ययोजना बनाई जाएगी।
राम खेलावन राठौर, अध्यक्ष, नगरपालिका, अनूपपुर।
जिला अस्पताल सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर रैबीज इंजेक्शन की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। अधिक संख्या में कुत्ते के काटने से घायल मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं। नगरीय प्रशासन को इसपर रणनीति बनाकर रोकथाम करनी चाहिए।
डॉ. आरपी श्रीवास्तव, सीएमएचओ, अनूपपुर।
Published on:
10 Jan 2018 05:41 pm
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