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सूखे की आहट या जलसंकट की चेतावनी: सावन बीता भाद माह में भी सोननदी में कमरभर पानी , अंत मानसून पर टिकी सम्भावनाएं

सूखे की आहट या जलसंकट की चेतावनी: सावन बीता भाद माह में भी सोननदी में कमरभर पानी , अंत मानसून पर टिकी सम्भावनाएं

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Drought or a warning of water conservation: Even after the Savan era,

सूखे की आहट या जलसंकट की चेतावनी: सावन बीता भाद माह में भी सोननदी में कमरभर पानी , अंत मानसून पर टिकी सम्भावनाएं

लगातार बारिश के बाद भी नदियों का नहीं उठ रहा जलस्तर, तीन माह में ६९६ मिमी बर्षा
अनूपपुर। जिले में मानसून की बारिश के तीन माह बाद अबतक मात्र ६९६.८ मिमी औसत वर्षा का आंकड़ा दर्ज हो सका है। जबकि अबतक सामान्य औसत वर्षा के रूप में ८२८ मिमी बारिश हो जानी चाहिए थी। लेकिन पिछले वर्ष के दर्ज आंकड़ों के साथ मंडरा रही सत्र वर्ष की बारिश के आंकड़ों ने फिर से मौसम विभाग सहित किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीर खींच दी है। जिले की सोन जैसी प्रमुख नदी में कमरभर पानी भी आगामी चंद दिनों उपरांत पानी की जगह रेत ही नजर आने का स्पष्ट संकेत दे रही है। हालंाकि भू-अभिलेख विभाग ने वर्तमान बारिश की बन रही स्थिति पर अंत मानसून से कुछ और बारिश की आशा की है। भू-अभिलेख कार्यालय का कहना है कि मौसम विभाग के अनुसार बारिश का सिस्टम एक्टिव हुआ है। साउथ-ईस्ट झारखंड पर उपरी हवा का दबाव बना हुआ है। जिसमें आगामी कुछ दिनों तक प्रदेश में बने मानसून का असर दिखेगा और अच्छी बारिश होती रहेगी। लेकिन फिलहाल तीन माह बाद भी ६९६.८ मिमी बारिश के दर्ज आंकड़ों में विभाग ने आगामी दिनों कहां कितनी बारिश गिरेगी पर अनिश्चितता जताई है। जबकि जिले में औसत वर्षा का रिकार्ड १३०६ मिमी दर्ज है।
आंकड़ों को देखा जाए तो वर्ष २०१५ के उपरांत जिले में औसत बारिश का आंकड़ा हजार मिमी बारिश का आंकड़ा पार नहीं कर सका है। जबकि वर्ष २०१४ में १०४८.६५ मिमी के बाद वर्ष २०१५ में ६३७.८९ मिमी तथा वर्ष २०१६ में ८४८ मिमी तथा वर्ष २०१७ में ७६४.२ मिमी वर्षा का आंकड़ा ही दर्ज हो सका था। इनमें वर्ष २०१५ और २०१६ को प्रदेश सरकार द्वारा सूखा जिला घोषित किया गया था। जबकि वर्ष २०१७ में कम बारिश की मात्रा के बावजूद खरीफ फसल के उत्पाद बेहतर होने पर इसे सूखा से वंचित रखा गया था। लेकिन वर्तमान सावन माह के बीतने और भाद माह के आरम्भ होने पर भी सोननदी सहित अन्य जिले की मुख्य नदियों में ५-७ फीट मोटी धार चलने की जगह कमरभर पानी भी नहीं बह रहा है। मुख्यालय स्थित तिपान नदी किसी नाला के समान बह रही है तो यहीं नहीं कोतमा की केवई नदी प्रत्येक तेज बारिश उपरांत पतली धार में तब्दील हो जाती है। जबकि पुष्पराजगढ़ की जोहिला का पानी अब भी राजेन्द्रग्राम मुख्यालय में २-३ फीट मोटी पानी से ज्यादा उंचा नहीं उठ सकी है। १ जून से आरम्भ हुई बारिश में जिले में अबतक मात्र ६९६.८ मिमी औसत बारिश दर्ज की गई है। इनमें अनूपपुर जिला मुख्यालय में कम बर्षा तथा अमरकंटक में सर्वाधिक वर्षा का स्तर दर्ज किया गया है। जबकि वर्ष २०१७ में २७ अगस्त तक ६४२.४ मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई थी। यानि पिछले वर्ष की तुलना में मात्र ४६ मिमी बारिश अधिक है।
बॉक्स: पिछले पांच वर्षो में बारिश का आंकड़ा
वर्ष बारिश की औसत मात्रा
२०१८ ६९६.८ मिमी वर्षा(२७ अगस्त २०१८ तक)
२०१७ ७६४.२ मिमी
२०१६ ८४८ मिमी
२०१५ ६३७.८९ मिमी
२०१४ १०४८.६५ मिमी
वर्सन:
पिछले वर्ष के सामान ही इस वर्ष भी बारिश के आंकड़े मिल रहे हैं। लेकिन जिस प्रकार मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है आगामी बारिश के आंकड़ों के सम्बंध में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। लेकिन यह भी सत्य है कि शुरूआती मानसून की जगह अब अंत की मानसून से ही कुछ आस दिख रही है।
शिवशंकर मिश्रा, अधीक्षक कार्यालय भू-अभिलेख विभाग अनूपपुर।

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