
केवई नदी की घाटों से निकल रहे रेत के वाहन
भालूमाड़ा. मानसून की बारिश के दौरान नदियों की भरती तलहटी तथा किनारों तक आने वाली पानी को देखते हुए शासन व प्रशासन ने रेत खदानों से रेत उत्खनन कार्य पर तीन माह तक के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रतिबंध 1 अगस्त से आगामी तीन माह तक जारी रहेगा। इस दौरान किसी भी रेत खदानों पर रेत का न तो उत्खनन किया जाएगा और ना ही परिवहन। लेकिन भालूमाड़ा स्थित केवई नदी के हनुमान दफाई, पीली दफाई और शिवलहरा नदी घाटों पर प्रतिबंध का कोई असर नहीं दिख रहा है। जबकि जिला अंतर्गत २७ रेत खदानों में अधिकांश रेत खदानों में अब मानसून के आखिर में हो रही लगातार बारिश से नदियों के उफान भरने के कारण नदी का पेट भरने लगा है जिसे देखते हुए रेत माफियाओं द्वारा नदियों का किनारा डूबने से पूर्व वहां जमे रेत को नदियों से निकालने तथा उसका स्टॉक जमा करने की होड़ लगे है। यहां दिन के समय निकाले जा रहे रेत को देखने के बाद भी अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
पूर्व की भांति अब भी नगरीय और ग्रामीण अचंलों में नवनिर्माण का कार्य जारी है। इनमें शासकीय विभागों के अंतर्गत भवनों, कॉलरी क्षेत्र के निर्माण कार्य सहित निजी भवनों का कार्य शामिल है। जबकि नियमानुसार रेत ठेकेदार द्वारा रेत का भंडारण भी नहीं किया जा सकता है, तो फिर इतने वृहत स्तर पर निर्माण कहां की रेत से कराए जा रहे हैं। लेकिन भालूमाड़ा स्थित केवई नदी के हनुमान दफाई, पीली दफाई और शिवलहरा नदी घाटों पर प्रतिबंध का कोई असर नहीं दिख रहा है। जबकि जिला अंतर्गत २७ रेत खदानों में अधिकांश रेत खदानों में अब मानसून के आखिर में हो रही लगातार बारिश से नदियों के उफान भरने के कारण नदी का पेट भरने लगा है जिसे देखते हुए रेत माफियाओं द्वारा नदियों का किनारा डूबने से पूर्व वहां जमे रेत को नदियों से निकालने तथा उसका स्टॉक जमा करने की होड़ लगे है।
इनका कहना है
ऐसा नहीं है शासन ने भले ही रेत खदानों को उत्खनन के लिए प्रतिबंध किया है, विभागीय जांच कार्रवाई भी जारी है। जल्द ही भालूमाड़ा क्षेत्र के खदानों पर जांच कराया जाएगा और उत्खनन करने वाले लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
राहुल शांडिल्य, निरीक्षक खनिज विभाग अनूपपुर।
Published on:
27 Aug 2018 06:06 pm

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