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आपातकालीन सेवाओं के भरोसे मरीजों का उपचार

प्रशासन अंजान: भगवान भरोसे कोतमा स्वास्थ्य केन्द

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Emergency Services Relieving Patients

आपातकालीन सेवाओं के भरोसे मरीजों का उपचार

अनूपपुर/कोतमा. सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कोतमा में 31 अगस्त को उपचार के दौरान १३ माह की मासूम की मौत के बाद गुस्साएं परिजनों द्वारा स्वास्थ्य केन्द्र में हंगामा मचाते हुए कोतमा बीएमओ केएल दीवान के साथ की गई मारपीट और डॉक्टरों द्वारा सामूहिक कार्य का बहिष्कार कर कार्रवाई की मांग में अब कोतमा स्वास्थ्य केन्द्र आपातकालीन सेवाओं के भरोसे संचालित हो रहा है। जहां पिछले तीन दिनों से सामान्य उपचार के लिए आने वाले मरीजों को उपचार कराए बगैर वापस लौटना पड़ रहा है। वहीं डॉक्टर भी बाह्य वार्ड विभाग से अपनी दूरी बना रहे हैं, जबकि घटना के बाद बीएमओ कोतमा केएल दीवान ने स्वास्थ्य केन्द्र की अव्यवस्थाओं की सुधी नहीं ली। हालात अब यह बन गए हैं कि गम्भीर मरीजों के साथ साथ सामान्य मरीज भी स्वास्थ्य केन्द्र आने से कतरा रहे हैं। मरीज के परिजनों का कहना है कि जीते जी अपने मरीज को मौत के मुंह नहीं भेज सकते। जब डॉक्टर अस्पताल में नजर ही नहीं आ रहे है तो इलाज हम किसके भरोसे कराए। सोमवार को कोतमा बीएमओ ने अपने साथियों के साथ सामूहिक इस्तीफे के पेशकश पर भी चुप्पी साध ली। बताया जाता है कि मीडिया के सवालों से बचने डॉ. दीवान ने अपने मोबाईल ही नहीं उठाए। वहीं सोमवार को शासकीय अवकाश होने के कारण एक डॉक्टर ने सुबह आपातकालीन सेवा में मरीजों की जांच पड़ताल की। विदित हो कि बीएमओ केएल दीवान के साथ अभ्रदता करते हुए मारपीट की घटना पर डॉक्टरों ने सामूहिक रूप में कार्य का बहिष्कार कर शनिवार१ सितम्बर को जिलेभर के डॉक्टरों के साथ कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा था। जिसमें डॉक्टरों ने मारपीट करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा 3 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर समस्त स्टॉफ द्वारा अपने पद से त्याग पत्र देने की बात कही थी। शिकायत पत्र में डॉक्टरों ने बताया है कि 31 अगस्त की दोपहर 3.56 बजे मुन्ना गुप्ता उर्फ धन प्रसाद पिता बलभद्र गुप्ता निवासी वार्ड क्रमांक ४ कोतमा अपनी नातिन को मृत अवस्था में अस्पताल लेकर आए थे। जिसका चिकित्सकीय परीक्षण डॉ. चिनमय पटेल द्वारा कर उसे मृत घोषित किया गया थी। जबरन डॉक्टर्स पर इलाज में लापरवाही का दोष लगाते हुए अस्पताल को जलाने तथा बीएमओ के साथ मारपीट की थी।
इनका कहना है
मेरी जानकारी में नहीं है, डॉक्टरों ने ओपीडी बंद कर रखी है तो इसकी जांच करवाते हैं। सामूहिक इस्तीफे की कार्रवाई नहीं होगी, पुलिस जांच जारी है। परिजनों को भी यह समझना होगा कि डॉक्टरों के साथ मारपीट या अभ्रदता स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करता है।
अनुग्रह पी, कलेक्टर अनूपपुर।