
जाने आखिर इस शहर का कैसे पड़ा नाम अमरकंटक, धार्मिक ग्रंथों में भी उल्लेख
अनूपपुर। पवित्र नगरी अमरकंटक जो नर्मदा ,सोन एवं जोहिला नदी का उद्गम स्थल है। इस पवित्र नगर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है, जहां ऋषि-मुनियों ने इसे अपनी तपोस्थली बनाकर यहां साधना करते हुए ज्ञान की प्राप्ति की थी। नर्मदा नदी के उद्गम स्थल के रूप में प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पर प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं। वहीं सैलानी भी अमरकंटक की विहंगम मनोहारी वादियों को भी निहारने पहुंचते हैं। जिसके नाम को लेकर कई धार्मिक ग्रंथों में प्रमाण मिले हैं। इसके साथ ही इससे कई विभिन्न नामों से भी धार्मिक ग्रंथों में संबोधित किया गया है।
आम्रकूट से नाम पड़ा अमरकंटक
अमरकंटक के नाम को लेकर कई धार्मिक ग्रंथों में यह प्रमाण मिलते हैं कि पूर्व में इसका नाम आम्रकूट था। यहां आम के पेड़ अधिक संख्या में पाए जाते थे। इसी को देखते हुए इस नाम का संबोधन ऋषि मुनियों ने किया होगा। महर्षि कालिदास रचित धार्मिक ग्रंथ रघुवंशम एवं मेघदूतम में इस नगर को आम्रकूट कहा गया है। मेघदूतम में इस क्षेत्र में काफी अधिक आम के बगीचों का उल्लेख किया गया है। मार्कंडेय पुराण में इसे अमरकंठ कहा गया है। जिसके आधार पर आम्रकूट से यह अमरकंटक के रूप में जाना जाता है।
धार्मिक एवं आयुर्वेद नगरी के रूप में है मान्यता
्रअमरकंटक नगर जो कि सतपुड़ा और मैकल पर्वत के मध्य स्थित है। प्राचीन समय से ही यह धार्मिक तथा आयुर्वेद के लिए प्रसिद्ध रहा है। यह प्राचीन काल से ही ऋषि मुनियों की तपोस्थली रहा है। इसके साथ ही आयुर्वेदिक रुप से यह जड़ी बूटियों के लिए भी समृद्ध रहा है। वर्तमान में आंखों के लिए उपयोगी गुलबकावली सिर्फ यहीं पाई जाती है। इसके साथ ही विभिन्न आयुर्वेदिक दवाओं से यह क्षेत्र समृद्ध है।
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Published on:
01 Jul 2022 10:18 pm
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