
Mother Narmada takes a ride on the sedan
अनूपपुर/अमरकंटक. 'वेदो, पुराणो और शास्त्रो में नर्मदा जयंती माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मनाई जाती है। शास्त्रों के अनुसार गंगा, यमुना के समान नर्मदा नदी का महत्व है। नर्मदा नदी में स्नान-ध्यान करने से समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं। इसलिए माता नर्मदा को जीवन दायनी तथा पृथ्वी लोक में अकेली रहस्यमयी नदी माना जाता है। वेदों की मान्यता के अनुसार भगवान शिवजी ने अमरकंटक के मैकल पर्वत पर नर्मदा को पृथ्वीवासी के कल्याण के लिए उत्पन्न किया था साथ ही शिव ने नर्मदा को वरदान दिया था की प्रलय काल में भी उसका विनाश नहीं होगा। नर्मदा जयंती के दिन नर्मदा नदी में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते है तथा सूर्यदेव को अध्र्य देते है। इसी परम्पराओं में बुधवार 24 जनवरी को मां नर्मदा जयंती मनाई जाएगी। जिसमें मंगलवार २३ जनवरी को पवित्रनगरी अमरकंटक तथा मैकल पर्वत के मध्य उद्गमित मां नर्मदा के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में नर्मदा मंदिर वरिष्ठ पुजारियों के साथ नगरवासियों द्वारा माता की पालकी सवारी निकाली गई और शोभायात्रा का आयोजन किया गया। नगर के बच्चे, बुजुर्ग और संतों के साथ मां पालकी में सवार होकर मंदिर परिसर से मुख्य मार्ग भ्रमण करते पुन: मंदिर पहुंची। इस दौरान जगह जगह भक्तों ने माता की पालकी का स्वागत करते हुए भक्तों के लिए स्वल्पहार की व्यवस्था की। वहीं पालकी के मंदिर पहुंचने पर मंदिर पुरोहितों व संतों ने मां नर्मदा का विशेष पूजन अर्चन कर कन्या पूजा और प्रसाद भोग लगाए। वहीं दोपहर को नगर भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें स्थानीय नगरवासी सहित आसपास गांवों के हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। जबकि शाम के समय मां नर्मदा के उद्गम पर महाआरती का आयोजन किया गया। जिसमें स्थानीय लोगों के साथ दूर-दराज से माता के दर्शन करने पहुंचे भक्तजन भी शामिल हुए। वैसे नर्मदा जयंती के मौके पर सुबह से ही भक्तों की भीड़ माताद के दर्शन के लिए उमड़ी रही। विदित हो कि प्रतिवर्ष मां नर्मदा के जन्मोत्सव को मां नर्मदा जन्मोत्सव समिति द्वारा जन्मोत्सव का पर्व मनाया जाता है। जिसके उपरांत सामाजिक रीत के अनुसार छठी उत्सव का भी आयोजन किया जाता है।
Updated on:
24 Jan 2018, 4:57 PM IST
Published on:
24 Jan 2018, 4:57 PM IST
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