
नोटिस तक नगरीय प्रशासन; 86 परिवारों के लिए जारी पट्टे की जमीन पर सैकड़ों की तादाद में बने भूस्वामी
भूमिहीन परिवारों के नाम आवंटित जमीन पर अमीरो का कब्जा
अनूपपुर। गरीबी रेखा से नीचे जी रहे गरीब परिवारों को बसाने के नाम पर १९९६ में आरम्भ की गई आवासीय योजना के तहत मुख्यालय स्थित तिपान नदी तट पर बसाई गई शांतिनगर कॉलोनी में अब अमीरों का कब्जा हो गया है। गरीबों की झुग्गी-झोपड़ी व मलिन बस्ती की जगह आलीशान पक्के भवन खड़े हो गए है। यहां तक कि कल तक शासन की पट्टेवाली जमीन पर अब निवासरत रहवासियों का अपना नक्शा खसरा चढ़ा हुआ है। वहीं लोगों की सुविधा के लिए नगरपालिका अनूपपुर शुरू से लेकर अंतिम छोर तक बने मकानों में जल, बिजली तथा सडक़ की सुविधा प्रदान कर रही है। लेकिन नगरपालिका को यह तक पता नहीं है कि वहां निवासरत अधिकांश लोग आसपास के रसूखदार परिवारों से तालुल्क रखते हैं जिनकी अन्य वार्डों में भी मकान हैं। लेकिन नगरपालिका ऐसे व्यक्तियों के चिह्नित करने के साथ उनके खिलाफ कार्रवाई करने से कतरा रही है। परिणामस्वरूप दिनोंदिन शांति नगर सहित अन्य स्थानों पर स्लम बस्ती के नाम पर अवैध कॉलोनियों का निर्माण हो रहा है। नपा सूत्रों के अनुसार योजना के तहत भूमिहीन व बेघर परिवारों को अस्थायी तौर शासकीय जमीन का पट्टा दिलाते हुए शांतिनगर कॉलोनी क्षेत्र में कुल ८६ परिवारों को योजना का लाभ दिया गया था। जिसमें बाद में कुछ परिवार अन्यत्र चले गए। लेकिन उनकी खाली जगहों को अन्य लोगों ने कब्जा कर उसपर अपना मकान बना लिया। जबकि नियमों के अनुसार पट्टा अस्थायी होता है। लेकिन देखते ही देखते अब ८६ की जगह लगभग दो सैकड़ा से अधिक कच्चे-पक्के मकानों की दीवार खड़ी है। यहां तक कि लोगों ने एनजीटी नियमों की अनदेखी करते हुए नदी तट से सटे पक्के भवनो का निर्माण कर लिया है। लेकिन इसके बाद भी नगरपालिका अनूपपुर इसे स्लम बस्ती यानि झुग्गी-झोपड़ी वाली दलित बस्ती के रूप में देख रही है।
नगरपालिका के अनुसार अनूपपुर नगरीय क्षेत्रांतर्गत लगभग ४-५ अवैध कॉलोनियां बसी हुई है। जिसमें शांतिनगर, पटौराटोला, चंदास टोला, उंजीर तालाब मेढ़ के चारों ओर लगभग आधा सैकड़ा मकान, सब्जी मंडी स्थित पटौराटोला। ये सारी कॉलोनियां शासकीय जमीन पर बसी है। लेकिन इनमें अधिकांश परिवारों के नाम खुद की जमीन का दस्तावेज है। बताया जाता है कि भू-माफियाओं ने गरीब परिवारों पैसे की लेन-देन पर फर्जी तरीके से उसे निजी जमीन के रूप में बेच दिया है। आंकड़ों में लगभग इन पंाच अवैध कॉलोनियोंं में लगभग दो सैकड़ा से अधिक परिवारों के पास शासकीय जमीन की बजाय निजी जमीन का दस्तावेज होगा। जो प्रशासन की निगाहों से ओझल है।
बॉक्स- अनदेखी में खड़ी हो गई पांच अवैध कॉलोनियां
यह आश्चर्य की बात है कि नगरपालिका द्वारा शांतिनगर कॉलोनी बसाने की प्रक्रिया में अब नगरीय क्षेत्र में चार-पांच अवैध कॉलोनियां खड़ी हो गई। जिसमें शासकीय जमीनों को बचाने की कवायद में नगरपालिका ने पूर्व कई बार इन कॉलोनियों का निरीक्षण कर घरों को चिह्नित करते हुए नोटिस जारी की। लेकिन हर नोटिस की प्रक्रिया के बाद कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। जबकि पूर्व में कलेक्टर नंद कुमारम् ने अवैध अतिक्रमणकारियों के खिलाफ नोटिस भेजते हुए कार्रवाई करने के निर्देश दिए। लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद सारी प्रक्रिया रूक गई।
वर्सन:
हाल के दिनों में हमने कॉलोनी में बने मकानों का सर्वे कराया है। कुछ अवैध रूप से बने मकानों को भी चिह्नित किया गया है। जल्द ही अतिक्रमण कारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए वहां से हटाया जाएगा।
रामखेलावन राठौर, अध्यक्ष नगरपालिका अनूपपुर।
Published on:
30 Aug 2018 08:44 pm
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