
स्वाभाविक मौत या हत्या: स्टाफ की लापरवाही में मासूम की मौत, दो सप्ताह से अस्पताल प्रशासन ने डाल रखा था मौत पर पर्दा
स्वस्थ्य हुआ अनाथ बच्चा शहडोल आश्रय शिशु गृह की बजाय दुनिया से हुआ अलविदा, डेथ रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई
अनूपपुर। जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती नवजातों की सुरक्षा में तैनात स्वास्थ्यकर्मी की लापरवाही ने एक अनाथ बच्चे को जीते जी मार डाला, जहां २३ जुलाई को उपचार के लिए भर्ती हुए अनाथ बच्चे ने ५ अगस्त की सुबह मौत के आगोश में सो गया। अनाथ बच्चे की मौत कैसे हुई पूरा मामले में जिला अस्पताल पिछले १८ दिनों से उलझा हुआ है, जिसमें खुद स्वास्थ्य विभाग मौत के कारणों में अपनी अस्पष्टता बनाए हुए है तथा डेथ रिपोर्ट आने की बात कह रही है। वहीं दूसरी ओर अनाथ बच्चे को शहडोल आश्रय शिशु गृह भेजने वाली महिला सशक्तिकरण विभाग अधिकारी भी मामले में चुप्पी साधी हुई है। अधिकारी का कहना है कि बच्चे की मौत की जानकारी सिविल सर्जन द्वारा दी गई है, लेकिन कारणों का उल्लेखन नहीं किया है। अधिकारी का कहना है कि अनाथ बच्चों को महिला सशक्तिकरण विभाग द्वारा ६ अगस्त को शहडोल आश्रय शिशु गृह भेजने की तैयारी के लिए जिला अस्पताल को निर्देश दिए गए थे। लेकिन अगले ही दिन अनाथ बच्चे का शव एसएनसीयू वार्ड के यूनिट में पाया गया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार वीडियों की फुटेज में ड्यूटी ऑवर में कार्यरत स्टाफ नर्स द्वारा रात १० बजे के बाद से सुबह ७ बजे तक बच्चे को डाईट नहीं दी गई, जहां अनुमान है कि नवजात की मौत गला सुखने व भूख के कारण हो गई होगी। लेकिन फिलहाल मामले में जिला अस्पताल कुछ बोलने से इंकार कर दिया है। सिविल सर्जन का कहना है कि मौत लापरवाही के कारण होने की सम्भावना है, लेकिन डेथ रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल सूत्रों का कहना है कि पूरे मामले को दबाने जिला अस्पताल प्रशासन ने नौनिहाल के शव का पीएम कराकर पीएम रिपोर्ट में डेथ के कारणों की जानकारी आने का इंतजार कर रही है। वहीं सिविल सर्जन ने तत्काल ही लापरवाह स्टाफ नर्स को एसएनसीयू से हटाकर आईपीडी वार्ड के लिए कर दिया है। लेकिन सम्बंधित स्टाफ नर्स ने एसएनसीयू छोडऩे से इंकार कर दिया है। जिसके बाद लापरवाही पूर्वक हुई नवजात की मौत के बाद एसएनसीयू में कार्यरत अन्य स्टाफों ने सम्बंधित स्टाफ नर्स के साथ कार्य करने से इंकार कर दिया है। उल्लेखनीय है कि २३ जुलाई की सुबह किसी निर्दयी मां ने अपने नवजात बालक को प्लास्टिक की थैली में डाल कोतमा के गोंविदा कॉलोनी स्थित नर्सरी में फेंक दिया था। फेंके जाने के दौरान बालक के सिर के उपरी हिस्से में लम्बा जख्म बन गया है, वहीं शरीर के अन्य हिस्से में भी चोंटे के निशान पाए गए थे। जिसे जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती के बाद शिशु चिकित्सक आदित्य साहू और ब्रजेश पटेल ने उसे सुरक्षित बचा लिया था। नौनिहाल को एसएनसीयू की एक स्टाफ ने फिडिंग कराकर उसे संक्रमण से बचाने में मदद की। जबकि ४ अगस्त को महिला सशक्तिकरण विभाग अधिकारी ने नवजात का परीक्षण कर उसे ६ अगस्त को शहडोल के आश्रय शिशु गृह भेजने की तैयारी के लिए जिला अस्पताल प्रशासन से कही। बताया जाता है कि ४ अगस्त को दिए निर्देश के बाद ही ५ अगस्त की सुबह नवजात का मृतावस्था में शव एसएनसीयू वार्ड में पाया गया था। लेकिन इस पूरे मामले में जिला अस्पताल प्रशासन
बॉक्स: पूर्व में भी एक नवजात की हुई थी मौत
नगरपालिका अनूपपुर के वार्ड क्रमंाक ११ में २० जुलाई की सुबह झाडिय़ों के बीच जन्म के चंद समय बाद फेंका गया नवजात बालक २२ जुलाई की रात ११ बजे जिंदगी की जंग हार हमेशा के लिए गहरी नींद में सो गया था। डॉक्टरों की लगातार अथक प्रयास के बाद भी एसएससीयू में भर्ती अज्ञात नवजात की दो दिन बाद मौत हो गई। इस मौत पर डॉक्टरों का कहना था कि कम समय में जन्मे बच्चे तथा चीटिंयो के काटने के कारण जख्म में संक्रमण अधिक हो गया था। बचाने के प्रयास पूरे किए गए थे। लेकिन अंत समय तक उसे बचाया नहीं जा सका।
वर्सन:
मामले की जानकारी मिली है। इसमें डेथ रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। कारणों के सामने आने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सम्बंधित स्टाफ नर्स को एसएनसीयू से हटाकर आईपीडी में लगाया गया है।
डॉ. आरपी श्रीवास्तव, सीएमएचओ अनूपपुर।
Updated on:
24 Aug 2018 08:53 pm
Published on:
24 Aug 2018 08:53 pm
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