
पशुओं के स्वास्थ्य के प्रति किसानों को जागरूक बनाने की आवश्यकता
अनूपपुर। राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम को प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने के उद्देश्य से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के तत्वावधान में बुधवार को कार्यशाला आयोजित की गई। इस अवसर पर पशुओं के स्वास्थ्य के प्रति किसानों को जागरूक बनाने की आवश्यकता बताई गई। कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए कुलपति प्रो. टीवी कटटीमनी ने कहा कि पशु पालन में महिलाओं का योगदान उल्लेखनीय है। यदि महिलाओं को उचित प्रशिक्षण प्रदान किया जाए तो पशुओं के माध्यम से किसान परिवार की आय को बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने केवीके के किसानों का आह्वान किया कि वे एक-एक गांव को गोद लेकर किसानों को पशु पालन के लिए उचित प्रशिक्षण प्रदान करें। क्षेत्र में चारा और घास पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, यदि पशुपालन सही से किया जाए तो पूरे क्षेत्र की दशा बदल सकती है। जनपद पंचायत अध्यक्ष पुष्पराजगढ़ हीरा सिंह श्याम ने केवीके के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि क्षेत्र में दूध का औसत उत्पादन कम है। यदि केवीके के विशेषज्ञ किसानों को उचित प्रशिक्षण प्रदान करें तो इससे किसानों की आय को बढ़ाया जा सकता है। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. शंकर प्रसाद पांडेय ने खुरपका, मुंहपका बीमारियों, कृत्रिम गर्भाधान और बू्रसेलोसिस बीमारी के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए इस संबंध में सरकार की योजनाओं के बारे में बताया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उत्तर प्रदेश के मथुरा में लांच किए गए राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी किया गया। कार्यक्रम में छह गांवों के किसानों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यशाला में डॉ. दीपक तखलति, डॉ. वाईसी दीक्षित, डॉ. वीपीएस चौहान ने किसानों की जिज्ञासाओं को शांत किया। इस अवसर पर पशुओं का टीकाकरण और उनके स्वास्थ्य की जांच भी की गई।
Published on:
12 Sept 2019 03:56 pm
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