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आईटी कंपनी की नौकरी छोड़, पावर लिफ्टिंग में बना रही भविष्य, देश के लिए खेलने की लालसा

परिजनों ने दिया सहयोग, प्रियंका वैश्य आज बन गई युवतियों की आइकन

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Quit IT company job, making future in power lifting, longing to play f

आईटी कंपनी की नौकरी छोड़, पावर लिफ्टिंग में बना रही भविष्य, देश के लिए खेलने की लालसा

अनूपपुर। कल तक घर की दहलीज बेटियों के पैर के लिए बनी बेडिय़ां, आज बेटियों के भविष्य में परिजनों द्वारा दिया गया सहयोग आसमान में नई उंचाईयां बनाने लगी है। पावरलिफ्टिंग जैसे खेल में अधिकांशत: युवाओं का दबदबा रहा है, लेकिन अब बेटियों ने भी इसमें अपना हुनर अजमा कर युवकों को मात दे दिया है। अनूपपुर जिले के राजनगर की प्रियंका वैश्य ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए न सिर्फ नौकरी छोड़ी बल्कि पावर लिफ्टिंग में अब तक कई प्रतियोगिताओं में शामिल होकर स्वर्ण पदक भी जीत परिवार और जिले का नाम रोशन की है। प्रियंका का सपना है अब एशियन गेम्स में शामिल होकर वह देश का प्रतिनिधित्व करने की है। प्रियंका के लिए उनके सपनों की उड़ान इतनी आसान नहीं थी। भोपाल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी करने के दौरान ही उन्हें वेटलिफ्टिंग का शौक लगा और बाद में धीरे धीरे स्थानीय जिम ज्वाइन करते हुए इसकी तैयारियां प्रारंभ कर दी। बाद में प्रियंका को यह महसूस हुआ कि नौकरी करने के दौरान वह वेटलिफ्टिंग की तैयारी में पर्याप्त समय नहीं दे पा रही है। जिसके बाद उसने नौकरी छोड़ दी और पूरे समय तैयारियों में जुट गई।
बॉक्स: ५ खिताब किया अपने नाम
प्रियंका वैश्य ने अब तक स्ट्रांगेस्ट वुमन ऑफ इंडिया का खिताब 5 बार जीत चुकी हैं। इसके साथ ही नेशनल पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल, बॉडी बिल्डिंग में मिस इंडिया का टाइटल जीतने के साथ ही इंटरनेशनल डेड लिफ्ट चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल भी हासिल कर चुकी है। प्रियंका की इस जीत को देखकर अब जिले की युवतियों में भी देश के लिए कुछ करने का सपना जगने लगा है। प्रियंका युवतियों को आगे आने और खेल की तकनीक बताने प्रशिक्षित भी कर रही है।
बॉक्स: परिवार का मिला साथ, छूने लगी आसमां
प्रियंका ने बताया कि उनके हर फैसले पर परिवार का भरपूर सहयोग मिलता रहा। किसी भी पल ऐसा नहीं लगा जहां वह खुद को अकेला महसूस कर रही हो। भविष्य में प्रियंका वेटलिफ्टिंग के लिए महिलाओं को आगे लाने के लिए खुद की एकेडमी खोलना चाहती हैं। जिससे उनके अनुभव का लाभ आगे भी महिलाओं को मिल सके।
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