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जिम्मेदार समाज ने करवा दी नाबालिकों की शादी, लिखित आश्वासनों के बाद सम्पन्न हो गया बाल विवाह

जिम्मेदार समाज ने करवा दी नाबालिकों की शादी, लिखित आश्वासनों के बाद सम्पन्न हो गया बाल विवाह
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विवाह रोकने में महिला सशक्तिकरण विभाग फेल, भाजपा नेता के सरंक्षण में बाल विवाह सम्पन्न
अनूपपुर। समाज से बाल विवाह जैसी कुरीतियों को रोकने शासन के निर्देशों में गठित महिला बाल विकास विभाग के प्रयासों पर उस समय पानी फिर गया, जब विभाग द्वारा दी गई समझाईशों के बाद भी २० अप्रैल की रात अनूपपुर जिला मुख्यालय नगरपालिका अनूपपुर के वार्ड १० में स्थानीय भाजपा नेता की शह पर वंशकार समाज की १५ वर्षीय बेटी बाल विवाह के बंधन में बांध गई। बाल विवाह की सूचना पर रात के समय मौके पर पहुंची कोतवाली पुलिस भी बिना किसी कार्रवाई वापस लौट गई। जबकि शादी समारोह के समापन उपरांत शनिवार २१ अप्रैल को दिनभर महिला सशक्तिकरण और पुलिस की टीम शादी वाले मंडप का चक्कर काटती रही। हालंाकि मामले में महिला सशक्तिकरण अधिकारी मंजूषा शर्मा ने कहा कि इसमें शामिल दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लेकिन फिलहाल कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद जिला प्रशासन सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के नाकों तले बाल विवाह के रस्म सम्पन्न हो गए। बताया जाता है कि वार्ड क्रमांक १० में वंशकार समाज के एक परिवार में १५ वर्षीय नाबालिग बेटी के विवाह की सूचना महिला सशक्तिकरण अधिकारी मंजूषा शर्मा को मिली थी। जिसे लेकर महिला अधिकारी द्वारा लगातार परिजनों को विवाह नहीं करने की समझाईश दी गई थी। इस दौरान १९ अप्रैल को महिला सशक्तिकरण अधिकारी ने नाबालिग परिवार के घर पहुंचकर उसके पिता से लिखित लिया था कि फिलहाल सिर्फ सगाई होगी तथा शादी कुछ सालों के बाद की जाएगी। लेकिन लिखित के बाद भी परिजनों ने चुपचाप २० अप्रैल को बाल विवाह करा दिया। सूत्रों की जानकारी के अनुसार २० अप्रैल को बाल विवाह होने पर रात के समय ही महिला सशक्तिकरण अधिकारी को सूचना दी गई थी। वहीं मौके पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने पूरी तैयारियों के बीच शादी को रोकने की समझाईश दी गई। लेकिन पुलिस के वहां से हटते ही परिजनो द्वारा नाबालिग का विवाह संपन्न करा दिया। बाल विवाह में यह भी बात सामने आई कि १५ वर्षीय नाबालिक किशोरी जो कक्षा ९ वीं की छात्रा थी के उम्र प्रमाण पत्र में जिला अस्पताल के तीन डॉक्टरों की टीम ने बिना कारण और उसकी वास्तविकाओं को जाने उम्र प्रमाण पत्र बना दिया है। जिसे लेकर बाजारों में चर्चाएं बनी है। विदित हो कि इससे पूर्व भी वर्ष २०१५ में जिला अस्पताल के डॉक्टरो द्वारा भी वर को नाबालिग होने के बाद भी बालिक होने का प्रमाण पत्र थमा उसे बाल विवाह के बांधने में मदद की थी। उस दौरान में स्थानीय भाजपा नेता ने सरंक्षण दिया था। जबकि दोनों घटनाओं में स्कूल की अंकसूची पर अंकित जन्म तिथि दरकिनार रही और किसी भी मामले में किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बॉक्स: अप्रैल माह में ही १७ बाल विवाह की शिकायत
अप्रैल २०१८ में ही अब तक १७ बाल विवाह की शिकायते महिला सशक्तिकरण अधिकारी को प्राप्त हुई। जिसमें एक बाल विवाह सम्पन्न हुआ। इससे पूर्व भी दो बाल विवाह को रोका गया था।
वर्सन:
मामला गम्भीर है, हमने इसमें पूर्व से ही सम्बंधित परिवार को समझाईश देते हुए विवाह नहीं करने की अपील की थी। बावजूद शादी सम्पन्न करा दिया गया है। मामले में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मंजूषा शर्मा, महिला सशक्तिकरण अधिकारी अनूपपुर।
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