
कॉलरी से हुए समझौते का जल्द कराएं निराकरण
अनूपपुर. कोतमा जनपद पंचायत के आमाडांड ओसीपी परियोजना से प्रभावित सैकड़ों किसान बुधवार ६ जून की दोपहर अनूपपुर जिला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे, जहां सैकडों की तादाद में प्रभावित भू-स्वामी किसानों ने अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए कलेक्टर कार्यालय का दरवाजा खटखटाया। कलेक्टर अनुग्रह पी ने दो दर्जन किसानों व उनके प्रतिनिधित्वकर्ता को बैठक कक्ष में बुलाकर किसानों व कॉलरी के करारनामें व हाईकोर्ट के निर्देशों में पूर्व में दिए
गए आदेशों पर बातचीत की। हालंाकि घंटों चली बातचीत में बुधवार को किसानों की समस्याओं का हल नहीं हो सका। सम्भावनाएं हैं कि गुरूवार को फिर से कलेक्टर को प्रभावित किसानों के बीच बैठक आयोजित होगी। विदित हो कि इससे पूर्व भी 1 जून को सैकड़ो की तादाद में कॉलरी प्रभावित किसान और कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे थे, जहां किसानों व उनके प्रतिनिधित्वकर्ताओं ने कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के निराकरण की अपील की थी। इस दौरान ज्ञापनकर्ताओं ने कोर्ट के आदेश के हवालें कॉलरी द्वारा जानबूझ कर किसानों को नौकरी व मुआवजे से वंचित किए जाने आरोप लगाया था।
किसानों का कहना था कि आमाडांड खुली खदान परियोजना से प्रभावित समस्त किसानों, कास्तकारों व एसईसीएल प्रबंधन व कलेक्टर की ओर से तहसीलदार की उपस्थिति में ग्राम कुहका में दोनों पक्षो की बीच रोजगार को लेकर चर्चा हुई थी। जिसमें कोतमा प्रबंधन के सुझाव अनुरूप दो एकड़ के समूह पर रोजगार देने की बात पर सहमति बनी थी। बैठक में संक्षिप्त पत्र तैयार कर प्रबंधन प्रतिनिधि, ग्राम पंचायत, सरपंच, सचिव व प्रशासन की ओर से तहसीलदार ने संयुक्त रूप से सहमति पत्र में हस्ताक्षर कर पत्र तैयार किया था और एसईसीएल प्रबंधन द्वारा इस समझौते के अनुसार रोजगार की कार्रवाई की गई।
जिसमें हाईकोर्ट के द्वारा 899 प्रभावितों को नौकरी की जगह कॉलरी द्वारा 516 लोगों को रोजगार दिया गया। लेकिन शेष नौकरियों में जमुना कोतमा प्रबंधन द्वारा कुछ किसानों से साथ सांठ-गांठ कर आगे किसानों को रोजगार न देना पड़े इसके लिए उन्होंने कुछ किसानोंं को आर्थिक मदद दे कर न्यायालय भेजा। जहां न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत होने के बाद रोजगार देने की प्रक्रिया बंद कर दी गई।
Published on:
08 Jun 2018 05:54 pm
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