
बिजुरी भूमिगत खदान के संचालन में तीन माह का और समय, मार्च से उत्पादन की सम्भावनाएं
अनूपपुर। बिजुरी भूमिगत खदान के दिसम्बर-जनवरी माह से चालू करने के कयास पर फिर से पानी फिर गया है। भूमिगत खदान के अंतिम बेस ब्लॉक डी सिम से पानी की पूरी तरह निकासी नहीं हो सकी है। इसके लिए प्रबंधक द्वारा और पम्प लगाकर पानी निकासी कराया जा रहा है। सम्भावना है कि डी ब्लॉक से पानी निकासी का कार्य जनवरी २०२१के शुरूआत सप्ताह में पूर्ण हो सकेगा। इसके अलावा मैन पावर और संसाधनों की पुन: व्यवस्था में कुछ माह का और समय लगेगा। कॉलरी सूत्रों द्वारा मार्च माह से बिजुरी भूमिगत खदान से दोबारा कोयला उत्पादन की सम्भावनाएं जताई गई है। माना जा रहा है कि अगर उच्च प्रबंधन द्वारा संसाधनों की व्यवस्था जल्द कराई जाती है तो प्रबंधन जनवरी-फरवरी से भी कोयला उत्पादन का कार्य आरम्भ कर सकता है। फिलहाल खदान के मार्च से पुन: संचालन पर प्रबंधन तेजी से पानी निकासी की मशक्कत में जुटा हुआ है। चार मंजिली बिजुरी भूमिगत खदान के ए सिम लॉगवॉल, बी सिम और सी सिम ब्लॉक के रास्ते का पानी खाली किया जा चुका है। जबकि डी सिम ब्लॉक का पानी खाली किया जा रहा है। पानी की जल्द निकासी के लिए और पम्प लगाए गए हैं। इससे पूर्व ७ उच्च क्षमता वाले पम्प लगाए गए थे, जबकि खदान के अंदर लगे ५ अन्य पम्पों की भी मदद लेकर खदान के भीतर भरे ३०० फीट गहरे पानी को निकाला जा रहा था।
बॉक्स: पांच माह से कोयला उत्पादन ठप
पिछले ५० वर्षो से कोयला उत्पादन करने वाली राष्ट्रपति पुरूस्कार से सम्मानित चार मंजिली बिजुरी भूमिगत खदान में ९ अगस्त से पूरी तरह बंद है। खदान में ३०० फीट मोटा पानी भर गया था। लेकिन लगातार बारिश होने के कारण दरारयुक्त स्थानों से पानी का रिसाव में खदान का पानी लगातार भरा रहा। १४ अगस्त से खदान आगामी आदेश तक के लिए पूरी तरह से बंद कर दिए गए थे। यहां रोजाना ५०० टन कोयला का उत्पादन होता है। जिसके लिए १५८ कर्मचारियों सहित प्रशासनिक अधिकारियों की टीम तैनात थी। लेकिन अब यहां से १५८ कर्मचारियों को पास के बहेराबांध खदान के लिए अस्थायी रूप में स्थानांतरित करते हुए अन्य संसाधनों को भी हटा दिया गया था।
बॉक्स: खदान संचालन में चुनौतियां
बिजुरी भूमिगत खदान के दोबारा संचालन में अब मैन पावर और संसाधन चुनौती बनेगी। बताया जाता है कि खदान में पानी भरने के कारण खदान के अंदरूनी ढांचा धराशायी हो गए हैं। स्टॉपिंग टूट गई है। मशीनरी के पानी में लगातार डूबे होने के कारण जंग लग गए हैं, इसे हटाने और नए लगाने में समय लगेगा, कोयला परिवहन बेल्ट सहित क्षतिग्रस्त पाइप लाइन को नए सिरे से लगाने की आवश्यकता होगी। लेकिन यहां इतनी मात्रा में नए संसाधन के लिए उच्च प्रबंधन इतने कम समय में तैयार नहीं होगा। माना जाता है कि खदान पूर्व से ही घाटे में चल रहा था, बंदी के बाद यह घाटा और अधिक बढ़ गया है।
बॉक्स: मिथने गैस का हुआ था रिसाव
२० नवम्बर की दूसरी पाली के दौरान सीओ-टू ठंडी और सीएच-फॉर जहरीले गैस का रिसाव हुआ था। गैस रिसाव की घटना पर कॉलरी प्रबंधन ने तत्काल मनेन्द्रगढ़ की रेस्क्यू टीम की मदद से काबू पाया था। हालांकि गैस की मात्रा कम रही, जिसके कारण किसी प्रकार के हादसा नहीं हुआ था।
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Published on:
17 Dec 2020 11:57 am
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