ग्रामीणों के अनुसार पिछले दो सालों से जमीनी विवाद व जलाशय के निर्माण को लेकर हुई टकरार में सबसे अधिक तीन ग्राम पंचायतों की आधा सैकड़ा गांव प्रभावित रही। इनमें अगरनियानार, लखनपुर, पिपरिया, ताराडांड के छह ग्राम, कर्राटोला के पांच गांव सहित दुलहरा के भी आधा दर्जन गांवों में रबी की फसल का उत्पाद नहीं हो सका। किसानों का मानना है कि इन तीन ग्राम पंचायतों में सब्जी सहित मोटे अनाज का उत्पाद सबसे अधिक होता है। यहां की सब्जियां जिला मुख्यालय सहित पूरे सम्भाग तक में अपनी पहुंच बनाई हुई है। लेकिन सिंचाई के अभाव मेंं यहां के जमीन का उत्पाद के लिए तरस रहा है। जबकि बांध निर्माण के अभाव में पानी की कमी में नदी सूखती नजर आ रही है।