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तीन साल में नहीं बना जलाशय

लापरवाही ऐसी कि भूमिअधिग्रहण तक नहीं हुआ, पानी की समस्या के जूझ रहे समीपी ग्रामीण

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Shahdol online

Mar 22, 2016

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अनूपपुर. जैतहरी जनपद पंचायत स्थित ताराडांड जलाशय क्षेत्रांतर्गत आनेवाले दर्जनों ग्राम पंचायत अब भी सिंचाई के अभाव में सूखाग्रस्त क्षेत्र के रूप में शामिल हैं। कृषि उत्पाद की अपार सम्भावनाओं के बाद भी क्षेत्र के किसानों के लिए खेती लाभ का धंघा नहीं बन सका। इसका मुख्य कारण आसपास ताराडांड जलाशय का निर्माण कार्य अबतक पूर्ण नहीं होना बताया जा रहा है। जबकि वर्ष 2013 के दौरान जल संसाधन विभाग द्वारा जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूर ताराडांड ग्राम पंचायत में करोड़ों की लागत से 69.64 हेक्टेयर भूमि पर ताराडांड जलाशय का निर्माण कराना आरम्भ कराया गया था। जिसमें अबतक विभाग द्वारा मात्र 50 फीसदी ही कार्य पूर्ण किए गए जा सके हैं, 50 प्रतिशत कार्य कराया जाना शेष है। जलाशय के निर्माण से जहां किसानों के चेहरे पर खुशी भी है वहां अबतब कार्य पूर्ण नहीं होने से निराशा भी। किसानों का कहना है कि जलाशय के निर्माण नहीं होने से रबी सीजन की फसलें नहीं हो सकी।

क्यों अटका है निर्माण
अनुविभागीय राजस्व अधिकारी अनूपपुर के अनुसार इस जलाशय के निर्माण खुद जलसंसाधन विभाग के साथ स्थानीय ग्राम पंचायत जनप्रतिनिधियों की रूचि नहीं बन रही है। जबकि पूर्व में प्रशासन द्वारा ताराडांड जलाशय निर्माण के लिए विभाग सहित जनप्रतिनिधियों को निर्धारित जमीन की सूची के साथ उसके अधिग्रहण करने के निर्देश जारी किए गए थे। लेकिन विभाग सहित जनप्रतिनिधियों द्वारा बार बार भूमि अधिग्रहण करने की प्रस्ताव राजस्व विभाग को भेज रही है। इसमें दो राय नहीं कि विभाग ने जलाशय के लिए अबतक पूरी प्रक्रियाओं के तहत भूमि-अधिग्रहण करने की नीति नहंी अपनाई।यही वजह है अबतक निर्माण प्रक्रिया में तीन बार भू अर्जन के लिए पत्र राजस्व विभाग के पास पहुंचे। जिसमें विभाग द्वारा सही सीमांकन की प्रक्रिया पूर्ण नहंी किए जाने की लापरवाही दिख रही है।

आधा सैकड़ा गांव को होती जलापूर्ति
जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार ताराडांड जलाशय को ग्राम पंचायत के बीच से गुजर रहे नाला के उपर बनाया जा रहा है। जिसमें मुख्यत: तीन ग्राम पंचायतों कर्राटोला, ताराडांड, दुलहरा के आधा सैकड़ा गांव को सिंचाई से जोड़ा जाता। इसके लिए तीनों ग्राम पंचायतों के बीच से मुख्य और सहायक दो नहरों के सहारे लगभग 340 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचित किया जाता। वहीं जलाशय के ले-आउट के आधार पर कुल 2.54 मिलियन घनमीटर पानी का भराव भी किया जाना प्रस्तावित है। इसमें जलाशय की अधिकतम उंचाई 15.41 मीटर उंची रखते हुए 1.82 मिलियन घनमीटर जल का सिंचाई में उपयोग किया जाना था। लेकिन विभाग अबतक इस जलाशय के निर्माण को आधा ही पूरा कर सकी है।
गांवों में सूखे जैसे हालात
ग्रामीणों के अनुसार पिछले दो सालों से जमीनी विवाद व जलाशय के निर्माण को लेकर हुई टकरार में सबसे अधिक तीन ग्राम पंचायतों की आधा सैकड़ा गांव प्रभावित रही। इनमें अगरनियानार, लखनपुर, पिपरिया, ताराडांड के छह ग्राम, कर्राटोला के पांच गांव सहित दुलहरा के भी आधा दर्जन गांवों में रबी की फसल का उत्पाद नहीं हो सका। किसानों का मानना है कि इन तीन ग्राम पंचायतों में सब्जी सहित मोटे अनाज का उत्पाद सबसे अधिक होता है। यहां की सब्जियां जिला मुख्यालय सहित पूरे सम्भाग तक में अपनी पहुंच बनाई हुई है। लेकिन सिंचाई के अभाव मेंं यहां के जमीन का उत्पाद के लिए तरस रहा है। जबकि बांध निर्माण के अभाव में पानी की कमी में नदी सूखती नजर आ रही है।

फरवरी तक था अल्टीमेटम
ताराडांड जलाशय के निर्माण को लेकर पूर्व में जलसंसाधन सम्भाग जैतहरी के अनुविभागीय अधिकारी आरएस नट ने इसे फरवरी 2016 तक की समयावधि कही थी। लेकिन मार्च के आरम्भ के साथ अबत जलाशय के निर्माण की प्रक्रिया आधी-अधूरी बनी हुई है।

जलाशय निर्माण में विभाग द्वारा भू-अर्चन के लिए बार बार पत्राचार किया जा रहा है। इसका मुख्य कारण जलाशय निर्माण की परिधि में आने वाली सीमाओं का सही तरीके से अर्जन नहीं किया जाना है। इसके लिए विभाग को पत्र लिखकर सख्ती से कार्य को पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही जलाशय का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा।
डीपी वर्मन, संयुक्त कलेक्टर व एसडीएम अनूपपुर

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