
Video Story- यहां मौसम हुआ बेईमान, बारिश की कमजोर बौछार से किसानों के माथे चिंता की लकीर
अनूपपुर। १७ जून से जिले के आसमान में सक्रिय हुई प्री मानसून की बौछार चंद दिनों में ही कमजोर पड़ गई है। शुरूआती दिनों की बौछार की भांति आसमान से पानी नहीं गिर रहा है। रोजाना काले बादल छा रहे हैं, हवाओं में नमी बनी है, बावजूद बारिश की बूंदों का अता पता नहीं है। वहीं प्री मानसून के आगमन के साथ १ लाख ८४ हजार हेक्टेयर की लक्षित खरीफ की तैयारी में जुटे १ लाख १० हजार से अधिक किसानों के माथे पर अब चिंता की लकीर खींच गई है। खेत बुवाई के लिए तैयार है। लेकिन खेतों में पानी की पर्याप्त मात्रा नहीं होने के कारण धान की रोपणी नहीं हो पा रही है। नर्सरी में लगा थरहा बारिश के इंतजार में बढ़ दिनोंदिन बड़ा हो रहा है। जबकि जिन किसानों ने पूर्व में छिंटवा बुवाई की है, अब उनकी खेतों की उपरी परत कड़ी और दरारयुक्त दिखने लगी है। इससे नीचे दबे बीजों के कमजोर पौधो उगने की आशंका बन गई है। किसानों का कहना है कि वर्तमान में बुवाई का सीजन है, लेकिन बारिश ने मुंह फेर लिया है। अगर समय पर मानसून नहीं बरसी तो खरीफ की बुवाई प्रभावित हो जाएगी।
१८४ हजार हेक्टेयर रकबे में मात्र ३२ फीसदी बुवाई
विभागीय जानकारी के अनुसार खरीफ फसल के लिए जिले में १ लाख ८४ हजार ७५० हेक्टेयर रकबा लक्ष्य के रूप में निर्धारित किया गया है। जिसमें वर्तमान में मात्र ३२ फीसदी रकबे पर किसानों ने बुवाई की है। इसमें मक्का की बुवाई संतोषजनक तो धान की बुवाई नाम मात्र हुई है। जबकि अन्य फसलों की बुवाई मात्रा भी शून्य नजर आ रही है। आंकड़ों में देखा जाए तो धान की १०५.९५ हजार हेक्टेयर में अब तक १.५० हजार हेक्टेयर जो मात्र १२ फीसदी है। मक्का १४.७२ हजार हेक्टेयर में ३.७९ हजार हेक्टेयर लगभग ७३ फीसदी, अरहहर ८.९० हजार हेक्टेयर में १.१० हजार हेक्टेयर लगभग २८ फीसदी, मूंगफली १.३० हजार हेक्टेयर में ८५० हेक्टेयर लगभग ६५ फीसदी और सोयाबीन की ५.६४ हजार हेक्टेयर में १.९५ हजार हेक्टेयर लगभग ३५ फीसदी बुवाई हो सकी है। इसके अलावा अन्य फसलों का आंकड़ा निम्न बना हुआ है।
नमी के अभाव में खेतों पर कड़ी हो जाएगी उपरी परत
कृषि जानकारों ने बताया कि खेतों में हल्की बारिश लगातार होने से उपरी परत नमीदार बनी रहती है। इससे छिंटवा या रोपी गई फसल आसानी से अंकुरित होकर मोटे तने के रूप में उपर आती है। जबकि धान की रोपणी में कम मात्रा में भी पानी होने पर आसानी से रोपा लगाया जा सकता है। लेकिन बारिश के अभाव में पूर्व की तैयार और बुवाई हुई खेत की उपरी परत कड़ी हो जाएगी। इसमें अंकुरित होने वाले पौधे के तने कमजोर और मरियल हो जाएंगे। इससे खाद-पानी के बाद भी उपज बेहतर नहीं होगी और आंधी पानी की तेज बौछार में झुककर टूट जाएगी। सबसे अधिक धान की फसल प्रभावित होगी, जो पानी के अभाव में ज्यादा ब्रिडिंग नहीं कर पाएगी।
पिछले साल की तुलना में भी कम बारिश की मात्रा
अधीक्षक-भू-अभिलेख विभाग अधिकारी एसएस मिश्रा ने बताया कि बारिश की मात्रा का माप जून माह से आरंभ होता है। जिसमें पिछले २७ दिनों में वर्षामापी केन्द्रों पर दर्ज हुए आंकड़ों में वर्तमान बारिश की मात्रा पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है। जिले में औसत बारिश की मात्रा १३०६ मिमी है। जिसमें २७ जून तक जिले में कम से कम १६७ मिमी बारिश हो जाना चाहिए था। लेकिन अब तक मात्र १३०.६ मिमी बारिश ही दर्ज हो सका है। जबकि पिछले वर्ष इस तिथि तक २१५.७ मिमी वर्षा दर्ज की गई थी जो तुलनात्मक रूप में ८५.१ मिमी वर्षा कम है।
ये है बारिश का आंकड़ा
बर्षामापी केन्द्र १से २७ जून २०२२ १ से २७ जून २०२१
अनूपपुर १४६.७ २२८.४(मिमी)
कोतमा १९५.१ १८८.०(मिमी)
जैतहरी १२७.४ २८५.०(मिमी)
पुष्पराजगढ़ ४५.३ २१७.२(मिमी)
अमरकंटक १२९.६ २५९.४(मिमी)
बिजुरी २०२.८ १३५.७(मिमी)
वेंकटनगर १०६.९ २४१.०(मिमी)
बेनीबारी ९१.४ १७१.०(मिमी)
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कुल वर्षा १०४५.२ १७२५.७(मिमी)
जिले में औसत वर्षा १३०.६ २१५.७ मिमी बारिश
वर्सन:
जिस प्रकार से शुरूआती प्री मानसून की बारिश हुई, उस रफ्तार में और बुवाई में गति आती। लेकिन कुछ दिनों से काले बादलों के बाद भी पर्याप्त बारिश नहीं हो पा रही है। लेकिन अभी समय है।
एनडी गुप्ता, उपसंचालक कृषि विभाग अनूपपुर।
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Published on:
28 Jun 2022 11:11 pm
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