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विश्व पृथ्वी दिवस: सघन पौधारोपण कर पर्यावरण की सुरक्षा कवच को बचाने का संकल्प

विश्व पृथ्वी दिवस: सघन पौधारोपण कर पर्यावरण की सुरक्षा कवच को बचाने का संकल्प
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World Earth Day: Resolve to save the environment's protective shell by

सघन पौधारोपण से बनाएं पर्यावरण का सुरक्षा कवच
विश्व पृथ्वी दिवस पर आईजीएनटीयू में कार्यक्रम आयोजित
अनूपपुर। विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय के तत्वावधान में पौधारोपण किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने पर्यावरण को बचाने और बढ़ते तापमान की रोकथाम के लिए सघन पौधारोपण अभियान चलाने का आह्वान किया। निदेशक (अकादमिक) प्रो. आलोक श्रोत्रिय के निर्देशन में शिक्षा संकाय की डीन प्रो. संध्या गिहर, पर्यावरण विभागाध्यक्ष डॉ. तरूण कुमार ठाकुर, डॉ. एमटीवी नागाराजू, डॉ. हरिहरन, डॉ. मारिया जोसेफिन और डॉ. देवी प्रसाद सिंह ने विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण किया। इसके बाद आयोजित कार्यक्रम में प्रो. श्रोत्रिय ने स्वच्छता और हरी-भरी पृथ्वी की उपयोगिता का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय सभ्यता में प्रारंभ से ही प्रकृति को सर्वोपरि मानते हुए इसका विशिष्ट स्थान बताया गया है। अब आवश्यकता इन्हीं सिद्धांतों को पुन: अपनाने की है। प्रो. गिहर ने प्रत्येक नागरिक के पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व को बताया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षकों और छात्रों ने भाग लिया।
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स्ंारक्षण के अभाव में सूखने की कगार पर तालाब, अधिकांश तलाब हो रहे दुर्दशा के शिकार
अनूपपुर नगर पालिका क्षेत्र में स्थित एक दर्जन से ज्यादा सार्वजनिक एंव निजी तालाब नगर पालिका एंव प्रशासन की उदासीनता के अभाव मे मिटते जा रहे है। एक ओर शासन द्वारा नदी, तलाबों के जल स्त्रोतो को बचाने के लिए प्रयासरत है, साथ ही जल संरक्षण को लेकर करोडो रुपए खर्च कर रही है। वहीं दूसरी ओर नगर पालिका में स्थित ज्यादतर तालाब देखरेख व जीर्णोद्धार नहीं होने के कारण सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं। नगर में ज्यादातर तालाबों की स्थिति तो यह है कि उनके चारो ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। वही कई तालाबों पर अतिक्रमणकारियों ने कब्जा जमाकर उसके अस्तित्व को ही खत्म कर दिया है। इसमें बस स्टैंड पुरनिया तालाब, कन्या स्कूल पास रामरिख तालाब, रेलवे स्टेशन तालाब, बस्ती बिसेन तालाब, वार्ड 5 शिव-सागर तालाब, केरहा तालाब, मवेशी बाजार तालाब, शासकीय आईटीआई के पास, दूर संचार के पीछे, लहसुई गांव, गोविन्दा गांव सहित अन्य तालाब दिनोंदिन बदहाली के शिकार बन गए हैं। जहां तालाबों में मेढ़ है लेकिन पानी नहीं है। पानी है तो अतिक्रमणकारियों का कब्जा जमा है।
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