
सहकारी बैंक
अशोकनगर@अरविंद जैन की रिपोर्ट...
राजनैतिक पार्टियों में तो जहां पैर छूने की परंपरा आम हो चुकी है, लेकिन यह अफसरशाही में भी अपनी पैठ जमा चुकी है। अपने अधिकारी का खुश रखने का कर्मचारियों ने जिले में यह गजब तरीका निकाल लिया है।
अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि सहकारी बैंक की महाप्रबंधक कलेक्ट्रेट आईं तो समिति प्रबंधकों में उनके पैर छूने की होड़ लग गई, जब वह मुडऩे लगीं तो कई समिति प्रबंधकों ने तो उनके पैर छुए। जब इसका कारण पूछा तो महाप्रबंधक ने जबाव दिया कि गुना की परंपरा है।
समर्थन मूल्य खरीदी के लिए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक गुना की महाप्रबंधक लता कृष्णन समिति प्रबंधकों की बैठक लेने के लिए आईं। शाम करीब 3:40 बजे जब वह कलेक्टे्रट में जीप से उतरीं तो वहां पहले से इंतजार में खड़े समिति प्रबंधकों की उनके पैर छूने के लिए होड़ लग गई और ज्यादातर समिति प्रबंधकों ने पैर छूकर उनका अभिवादन किया।
वहीं कुछ समिति प्रबंधक तो उनके मुडऩे के बाद भी पीछे से ही झुककर पैर छूने का प्रयास करते दिखे। लेकिन जब महाप्रबंधक ने अभिवादन के इस गजब तरीके की फोटो-वीडियो बनते देखा तो नाराजगी जताई और मीडियाकर्मियों से फोटो-वीडियो न बनाने के लिए कहा।
कलेक्ट्रेट में यह लोग बड़े गौर से अधिकारी को खुश करने के इस गजब तरीके को देखते रहे और शहर में भी दिनभर यह मामला चर्चा में रहा। अधिकारी की नजर में अच्छा बनने मीडिया को रोकने पहुंचे कर्मचारी- अफसरशाही में अभिवादन के इस तरीके के फोटो खिंचते और वीडियो बनते देख महाप्रबंधक ने समिति प्रबंधकों से नाराजगी जताई और कहा कि आप लोगों ने ही मीडिया को बुलाया होगा। बाद में वह मीडिया से बोलीं यह घर का मामला है।
वहीं कलेक्ट्रेट में खुले में ही एक साथ खड़े होकर समिति प्रबंधक और महाप्रबंधक आपस में चर्चा कर रहे थे, उसी दौरान अधिकारी की नजर में अच्छा बनने के लिए सहकारी समिति धुर्रा के समिति प्रबंधक भानु रघुवंशी मीडिया को रोकने पहुंच गए और कहा कि हमारी तो विभाग की मीटिंग चल रही है, आप लोग फोटो क्यों खींच रहे हैं।
लोगों का सवाल:क्या इसीलिए नहीं होती कार्रवाई-
अपने अधिकारी को खुश रखने के लिए समिति प्रबंधकों को सैंकड़ों लोगों ने कलेक्ट्रेट में पैर छूते देखा। इससे दिनभर लोगों में यह मामला चर्चा बना रहा है और वह सवाल भी करते दिखे कि क्या इसी वजह से समितियों और खरीदी में होने वाली गड़बडिय़ों पर कार्रवाई नहीं की जाती है।
कारण कुछ भी हो, लेकिन इस मामले ने सवाल खड़े कर दिए है कि भृष्टाचार के बड़े-बड़े मामले उजागर होने के बावजूद भी समिति प्रबंधकों पर आखिर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं होती है।
मामले जो उठा रहे हैं विभाग पर सवाल-
जिले के चंदेरी में भावांतर योजना में प्रदेश का बड़ा घोटाला उजागर हुआ। चार अधिकारियों की टीम ने जांच कर समिति प्रबंधक को सवा सात लाख रुपए का शासन को चूना लगाने का दोषी ठहराया। लेकिन इस मामले में समिति प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई न करते हुए सिर्फ राशि जमा करने के निर्देश दिए गए।
- खरीदी में गड़बड़ी मिलने पर चार समिति प्रबंधकों को निलंबित करने के लिए तत्कालीन कलेक्टर बीएस जामोद ने महाप्रबंधक को पत्र लिखे। लेकिन एक समिति प्रबंधक निलंबित किया गया। वहीं कलेक्टर डॉ.मंजू शर्मा ने भी खरीदी में गड़बड़ी करने वाले समिति प्रबंधकों को निलंबित करने के निर्देश दिए। महाप्रबंधक कार्यालय में कलेक्टरों के पत्रों पर कोई गौर ही नहीं किया गया।
- विभिन्न गड़बडियों की जांचों में कई समिति प्रबंधक दोषी पाए गए, लेकिन ज्यादातर के खिलाफ नाम मात्र की कार्रवाई की गई। नतीजतन समिति प्रबंधक खरीदी सहित अन्य कामों में बेखौफ होकर गड़बडिय़ां करने में लिप्त हैं।
समिति प्रबंधकों ने कहा नहीं खरीदेंगे खरीदी-
जिले में उड़द सहित खरीफ सीजन की अन्य फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए 35 केंद्र बनाए गए हैं। शुक्रवार को बैठक लेने आईं जीएम से समिति प्रबंधकों ने खरीदी न करने की बात कही और कहा कि पिछले दो साल की खरीदी का कंप्यूटर ऑपरेटरों का मानदेय नहीं मिला, वहीं हम्मालों की राशि भी नहीं मिली। समिति प्रबंधकों ने कहा कि शॉर्टेज हो जाने से किसानों का भुगतान नहीं हो पाया और अधिकारी भुगतान के लिए दबाव बना रहे हैं।
Published on:
13 Oct 2018 12:28 pm
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