
अशोकनगर के तुलसी सरोवर में हनुमान मूर्ति के निर्माण में आ रहे रोड़े (फोटो सोर्स- AI)
Lord Hanuman statue: अशोकनगर स्थित तुलसी सरोवर में प्रतिमा स्थल को आर्द्रभूमि बताकर आपत्ति आई तो काम रुका हुआ है, लेकिन जल संसाधन विभाग ने इसे आर्द्रभूमि न होना बताया है। इससे नगरपालिका ने पांच माह पहले अपनी रिपोर्ट भेज दी है और अब निर्माण कार्य शुरू होने के लिए नपा को प्रशासन की हाँ का इंतजार है।
मामला शहर के तुलसी सरोवर में प्रस्तावित 111 फीट ऊंची हनुमानजी की प्रतिमा का है। पहले इसे सरोवर के बीच लगाने का प्रस्ताव था, इसके लिए शहर के लोगों ने प्रतिमा निर्माण के लिए 50 लाख रुपए एकत्रित कर ग्वालियर के मूर्ति कलाकार को मूर्ति बनाने के लिए दिए थे। लेकिन अधिकारियों की टीम ने मिट्टी को खराब बताया तो सरोवर में किनारे पर स्थान तय किय गया। जहां मुख्यमंत्री अधोसंरचना की राशि से कार्य भी शुरू हो गया था।
छत्तीसगढ़ के नितिन सिंघवी नाम के व्यक्ति ने इस जगह को आर्द्रभूमि बताकर वर्ष 2024 में मप्र राज्य वेटलैंड प्राधिकरण में आपत्ति दर्ज कराई थी। इस पर तत्कालीन कलेक्टर ने काम रुकवाकर बिंदुवार वस्तुस्थिति मांगी थी। 17 मई 2024 को तहसीलदार ने रिपोर्ट दी कि निर्माण स्थल की जमीन ज्यादातर मप्र शासन की है, जबकि कुछ हिस्से निजी हैं। काम इन जमीनों के बीच के अंश में हो रहा है।24 मई को जल संसाधन विभाग ने बताया कि तुलसी सरोवर 1972-76 के बीच सिंचाई के लिए बना था, इसलिए इसे वेटलैंड नहीं माना जाना चाहिए।19 दिसंबर को नपा ने इन रिपोर्टों के आधार पर वेटलैंड प्राधिकरण से रोक हटाने की मांग की। अब निर्माण को प्रशासन की मंजूरी का इंतजार है। अब इस मामले में नगर पालिका की हां इंतजार है।
Published on:
30 May 2025 11:07 am
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