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जिला अस्पताल: स्थाई समस्याओं का नहीं निकला हल

अशोकनगर. जिला चिकित्सालय में कुछ समस्याएं स्थाई होकर रह गई हैं। बार-बार के निरीक्षण व दिशा-निर्देशों सहित वरिष्ठ अधिकारियों के आश्वासन के बावजूद समस्याओं का कोई समाधान नहीं हो रहा है।

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praveen praveen

Dec 28, 2016

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अशोकनगर. जिला चिकित्सालय में कुछ समस्याएं स्थाई होकर रह गई हैं। बार-बार के निरीक्षण व दिशा-निर्देशों सहित वरिष्ठ अधिकारियों के आश्वासन के बावजूद समस्याओं का कोई समाधान नहीं हो रहा है। अब अपर संचालक को आना है और एक बार फिर अस्पताल भवन व परिसर को चकाचक करने का दौर शुरू हो गया है।

जिला अस्पताल में सबसे बड़ी समस्या पानी की निकासी है। इसके लिए करीब दो सालों से लगातार दिशा-निर्देश जारी हो रहे हैं। लेकिन अभी तक पानी निकासी की व्यवस्था नहीं हो पाई है। इसके कारण नवीन भवन के पीछे पीएम रूम के सामने गंदा पानी जमा रहने से दलदल मचा रहता है और पीएम करने के लिए भी इसी दलदल को पार कर जाना पड़ता है। यहीं एक गड्ढे में अस्पताल का पानी छोड़ा जा रहा है।


गड्ढे के आसपास जमा पानी व कीचड़ में मक्खी-मच्छरों सहित नमी में रहने वाले अन्य कीट पनप रहे हैं। गड्ढे का पानी रिसकर आसपास के घरों के नलकूपों में जा रहा है। इसकी रहवासी शिकायत भी कर चुके हैं।


गड्ढे के बाहर फैला रहता है कचरा

अस्पताल से निकलने वाले कचरे को फेंकने के लिए भी एक गड्ढा किया गया था। इसमें लगातार कचरा फेंके जाने से यह भर जाता है और इसके बाद कचरा यहां-वहां फैलता है।

आखिर कब मिलेगी सोनोग्राफी की सुविधा

जिला चिकित्सालय में सोनोग्राफी मशीन तो है, लेकिन कई सालों से यह बंद पड़ी है। इसका कोई पाटर््स खराब हो गया था। सोनोग्राफी मशीन न होने के कारण मरीजों को प्राइवेट में सोनोग्राफी करवानी पड़ती है। आवश्यक होने पर अस्पताल प्रबंधन सोनोग्राफी का खर्चा देता है। लेकिन सामान्य स्थितियों में मरीजों को ही इसका खर्च वहन करना पड़ रहा है।


सफाई व डाक्टरों की अनियमितता

जिला अस्पताल की ओपीडी में आए दिन डाक्टरों के न पहुंचने की शिकायत रहती है। मरीजों को यह भी नहीं बताया जाता कि डाक्टर आएंगे या नहीं। इसके कारण मरीज पर्चा बनवाने के बाद यहां-वहां भटकते रहते हैं। इसके अलावा कई विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी भी अस्पताल में है। वहीं साफ-सफाई का ध्यान भी कम ही रखा जाता है। पंखों, अलमारियों, पलंगों के पास रखे स्टेंडों आदि पर धूल जमी रहती है।


स्टेट कंसल्टेंट द्वारा बताई गईं कमियां

-नर्सों के कक्ष में दवाओं के डिब्बे सही नहीं पाए गए। दवाएं काटकर उनमें रखीं गईं, इससे उनकी एक्सपायरी डेट दिखाई नहीं दे रही। उन्होंने दवाओं के पैकेट को न काटने की हिदायत दी।

-वार्डों में नर्सों के पास एक्सापायरी डेट की दवाइयां पाई गईं। इन्हें कंसल्टेंट द्वारा हटवाया गया।

-डस्टबिन भी सही नहीं पाए गए। जिस रंग का डस्टबिन है, उसी रंग की पॉलीथिन लगाने के निर्देश उन्होंने दिए साथ ही गैलरियों में केवल काला डस्टबिन ही रखने को कहा।

-डाक्टरों को केपिटल लेटर्स में ही दवाइयां लिखने की हिदायत दी।

-चादर-कंबल आदि को इस तरह रखने की हिदायत दी कि उसमें धूल या कोई कीड़े-मकोड़े न जाएं।

-वार्डों और नर्सों के कक्ष से कंडम हो चुकी चीजों को हटवाया गया।


ये हुआ बदलाव

-अस्पताल में प्रतिदिन तीन से चार बार झाड़ू-पोंछा हो रहा है।

-वार्डों के पास और गैलरियों में नए डस्टबिन रखे गए हैं।

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-जूते चप्पल रखने के लिए स्टैंड लगा दिए गए हैं।

-पूरे परिसर व बिल्डिंग में सफाईअभियान जोरों पर है। इससे अस्पताल चकाचक नजर आ रहा है।

-सफाई के लिए दो वाशिंग मशीनें आ गई हैं।

संबंधित खबरें

-दवाएं रखने के लिए नए डिब्बे रखवा दिए गए हैं।

-ओटी में दो नई मशीनें लगवा दी गई हैं।

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