
Sarthak App Fake Attendance (photo: patrika)
Sarthak App Fake Attendance: मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिला अस्पताल में ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करने वाला एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें अस्पताल के इमरजेंसी रूम में बैठे एक डॉक्टर को सार्थक ऐप के जरिए साथी डॉक्टर की उपस्थिति दर्ज करते देखा जा रहा है।
मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली चर्चा में आ गई है। वीडियो में जिला अस्पताल में पदस्थ डीआरपी के डॉ. आशुतोष, जो एनेस्थीसिया विशेषज्ञ बताए जा रहे हैं, अपने मोबाइल पर सार्थक ऐप खोले नजर आ रहे हैं। उनके हाथ में एक टैबलेट है, जिसमें साथी डॉक्टर डॉ. अभिषेक प्रजापति का वीडियो (पत्रिका पुष्टि नहीं करता) चल रहा है।
वीडियो में दिखता है कि जैसे ही एप में फेस स्कैन का विकल्प आता है, टैबलेट पर चल रहे चेहरे को मोबाइल कैमरे के सामने किया जाता है और उपस्थिति दर्ज (Sarthak App Fake Attendance) हो जाती है। वीडियो सामने आने के बाद शासन की उस ऑनलाइन व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं, जिसे शासकीय दफ्तरों और अस्पतालों में समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया था। ऐप में जीपीएस लोकेशन और फेस स्कैन दोनों अनिवार्य हैं, ताकि कर्मचारी निर्धारित स्थान से ही अपनी उपस्थिति दर्ज कर सकें।
जानकारी के अनुसार पीजी डॉक्टरों को डीआरपी योजना के तहत तीन माह तक जिला अस्पतालों में सेवाएं देना अनिवार्य होता है। अशोकनगर जिला अस्पताल में 8 डीआरपी डॉक्टर कार्यरत हैं। शासन की ओर से इन्हें विशेषज्ञ सेवाओं के लिए जिला अस्पताल का वीडियो वायरल मानदेय भी दिया जाता है।
वीडियो वायरल होने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि तकनीकी व्यवस्था में इस तरह सेंध लगाई जा सकती है, तो ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली की पारदर्शिता और प्रभावशीलता कितनी सुरक्षित है। फिलहाल मामले को लेकर संबंधित विभाग स्तर पर जांच की बात सामने आ रही है। अब निगाह इस बात पर है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है? भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए व्यवस्था में किस तरह सुधार किए जाते है?
वीडियो वायरल (Sarthak App Fake Attendance) होने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि तकनीकी व्यवस्था में इस तरह सेंध लगाई जा सकती है, तो ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली की पारदर्शिता और प्रभावशीलता कितनी सुरक्षित है। फिलहाल मामले को लेकर संबंधित विभाग स्तर पर जांच की बात सामने आ रही है। अब निगाह इस बात पर है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है? भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए व्यवस्था में किस तरह सुधार किए जाते है?
बताते चलें कि 2025 में भी Sarthak App Fake Attendance के मामले सामने आ चुके हैं। उस समय भी जब पोल खुली तो स्वास्थ्य विभाग सकते में आ गया था। अब इस मामले के सामने आने के बाद एक बार फिर Sarthak App पर सवाल उठने लगे हैं।
डीआरपी से आए छात्र वीडियो में कुछ कृत्य करते दिख रहे हैं, जिसमें नोडल अधिकारी द्वारा जांच की जा रही है। जांच (Sarthak App Fake Attendance) सही पाई जाती है तो कार्रवाई होगी। जिला अस्पताल में डीआरपी के 11 डॉक्टर पदस्थ हुए थे। आठ काम कर रहे हैं। यह मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएशन के छात्र हैं, जिन्हें पढ़ाई के दौरान तीन महीने यहां आकर काम करना होता है और इसका उन्हें मानदेय मिलता है। जांच पूर्ण होने पर कार्रवाई के लिए वरिष्ठ कार्यालय को भी लिखेंगे, जो अटेंडेंस लगाई गई है, उसे भी निरस्त करेंगे।
-डॉ.भूपेंद्रसिंह शेखावत, सिविल सर्जन जिला अस्पताल
Published on:
08 May 2026 10:25 am
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