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ग्रामीण ने केंद्रीय मंत्री से मांगा हैंडपंप, अफसरों ने थमा दी कमर बेल्ट

MP News: मध्य प्रदेश में प्रशासन का अजब-गजब कारनामा। ग्रामीण ने केंद्रीय मंत्री से गांव की प्यास बुझाने के लिए हैंडपंप मांगा तो अफसरों ने उसे भेज दिया बेल्ट।

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villager asked Union Minister hand pump but officials handed him belt MP News

villager asked Union Minister hand pump but officials handed him belt (फोटो- Patrika.com)

MP News: सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता और अफसरशाही की लापरवाही का एक ऐसा हास्यास्पद लेकिन शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने पूरी प्रशासनिक मशीनरी को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अशोकनगर जिले के कचनार गांव में एक ग्रामीण ने अपनी पूरी बस्ती की प्यास बुझाने के लिए सरकार से हैंडपंप की गुहार लगाई थी, लेकिन अधिकारियों की जादुई फाइलों ने जमीन से पानी निकालने वाले भारी-भरकम हैंडपंप को कमर बेल्ट में तब्दील कर दिया। हद तो तब हो गई जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम से हितग्राही को बधाई पत्र भी मिल गया। जबकि हकीकत यह है कि गांव में न हैंडपंप लगा और न ग्रामीण को वह तथाकथित बेल्ट नसीब हुआ।

शिविर में लगाई थी पानी की गुहार

पूरा मामला 4 अप्रेल को कचनार में आयोजित केंद्रीय मंत्री सिधिया के जन समस्या निवारण शिविर से शुरू हुआ। यहा निवासी गेंदालाल अहिरवार ने बस्ती में पानी की भीषण किल्लत को देखते हुए एक लिखित आवेदन दिया था। आवेदन के विषय में स्पष्ट अक्षरों में दर्ज था 'बस्ती में नवीन हैंडपंप लगवाने के संबंध में। गेंदालाल ने उम्मीद जताई थी कि मंत्री के संज्ञान में मामला आने के बाद उनकी बस्ती को जलसंकट से मुक्ति मिल जाएगी।

प्रमाणीकरण भी जारी हो गया

आवेदन जमा होते ही लालफीताशाही का खेल शुरू हो गया। गेंदालाल के आवेदन (टोकन नंबर 58) को संबंधित विभाग के अधिकारियों ने इस कदर प्रोसेस किया कि हैंडपंप की मांग सहायक उपकरण यानी कमर बेल्ट बन गई। जनपद पंचायत अशोकनगर के सामाजिक सुरक्षा अधिकारी ने तो एक कदम आगे बढ़ते हुए बकायदा प्रमाणीकरण भी जारी कर दिया कि आवेदक को सहायक उपकरण प्रदान किया जा चुका है। अधिकारियों की इस कागजी बाजीगरी ने एक सार्वजनिक समस्या को व्यक्तिगत उपकरण की आपूर्ति दिखाकर फाइल बंद कर दी।

ठगा महसूस कर रही पूरी बस्ती

विडंबना देखिए कि कागजों में जिस समस्या का समाधान मात्र 10 दिन में हो गया और दिल्ली तक रिपोर्ट पहुंच गई, वह धरातल पर शून्य है। आज गेंदालाल और उनकी पूरी बस्ती भी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रही है। ग्रामीण कहते हैं. मामला सिर्फ एक गलत प्रविष्टि का नहीं, बल्कि उस सिस्टम की पोल खोलता है जो बिना भौतिक सत्यापन के कागजों पर विकास की इबारत लिख देता है। ग्रामीण सवाल पूछ रहे हैं कि क्या अधिकारियों की इस लापरवाही से उनकी प्यास बुझ पाएगी।

मंत्रीजी के बधाई पत्र से चौंका ग्रामीण

प्रशासन की इस गलत रिपोर्टिंग का परिणाम यह हुआ कि 16 अप्रैल को गंवालाल के घर भारत सरकार के मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के हस्ताक्षर वाला पत्र पहुंचा। पत्र में लिखा था प्रिय गेंदालाल जी, शिविर में आपका आवेदन (58) प्राप्त हुआ था जो कमर बेल्ट दिलवाए जाने से संबंधित था… मुझे अवगत कराया गया है कि आपको कमर बेल्ट प्रदान कर दी गई है। पत्र के अंत में उनके सुखद जीवन की कामना भी की गई। यही से इस कारनामे से पर्दा उठा।