
MP में अमानक पानी पर बड़ी कार्रवाई, न पैकिंग की तारीख मिली न ही बैच नंबर
अशोकनगर। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में जेल के पीछे स्थित एक वाटर फिल्टर प्लांट पर शनिवार को एसडीएम सुरेश जादव व खाद्य सुरक्षा अधिकारी विष्णु दत्त शर्मा अचानक पहुंच गए।
यहां उन्होंने पानी के पाउचों का सैंपल लिया और बचे हुए पाउच जब्त कर प्लांट पर ही सुपुर्दगी में दे दिए। इस प्लांट पर यह दूसरी कार्रवाई है।
अधिकारी जब प्लांट पर पहुंचे तो वहां पानी को फिल्टर किए बिना ही पाउच भरे जा रहे थे। इसके अलावा पाउचों पर बैच नंबर व पैकिंग दिनांक भी नहीं डाली गई थी और इन्हें ऐसे ही बोरियों में पैक कर दिया गया था। पाउच वाटर वेब के नाम से भरे जा रहे थे।
बारीकी से देखने पर पता चला कि पैकिंग पर केवल प्लांट मालिक का नाम लिखा था। जबकि इस पर प्लांट का पता भी होना चाहिए था। अनियमितता मिलने पर पानी के 60 पाउच सैंपल के रूप में लिए गए। जिन्हें जांच के लिए राज्य प्रयोग शाला भेजा जाएगा।
बचे पाउचों को पहले बाजार में न बेचने की सख्त हिदायत दी गई, लेकिन फिर चर्चा के बाद इन्हें जब्ती में लेने पर सहमति बनी। साथ ही टीम ने पाउच बनाने वाली मशीन को भी सील कर दिया है। यहां कुल 1600 लीटर पानी के पाउच जब्त किए गए हैं। इन्हें 80 बोरियों में भरकर वाटर फिल्टर प्लांट की सुपुर्दगी में ही रख दिया गया है।
नहीं दिखाए दस्तावेज
प्लांट पर अधिकारियों को मालिक मनीष जैन नहीं मिले। उन्होंने दस्तावेज दिखाने को कहा तो कर्मचारियों ने बताया कि मालिक बाहर गए हैं, उनके आने के बाद दस्तावेज पेश कर देंगे।
वहीं पानी का फिल्टर न करने का कारण पूछने पर कर्मचारियों ने बताया कि फिल्टर का पंप खराब हो गया है, इसलिए बोर से सीधे आ रहे पानी को ही पाउचों पर भरकर पैक कर दिया गया।
मिठाई दुकानों पर भी सैंपलिंग
इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिठाई की दुकानों से भी सैंपलिंग की। इसमें मां अन्नपूर्णा स्वीट्स से बेसन के लड्डू का सैंपल लिया गया।
वहीं विवेक टॉकिज गली में सुराना मिष्ठान भंडार से मिल्क केक व कमल स्वीट्स से मावे का सैंपल लिया गया। सभी सैंपल जांच के लिए राज्य प्रयोग शाला भेजे जाएंगे। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
यह बोले जिम्मेदार
सैंपल रिपोर्ट निगेटिव आने पर संचालक के खिलाफ तीन से पांच लाख तक जुर्माना हो सकता है। प्रथम दृष्टया यह नियम विरुद्ध है, लेकिन प्रकरण लैब से जांच रिपोर्ट आने के बाद ही बनेगा।
- विष्णु दत्त शर्मा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी
यहां वाटर वेब के नाम से पानी के पाउच पैक किए जा रहे हैं, जिसमें बिना फिल्टर किए बोर का पानी भरा जा रहा था। इसके अलावा आवश्यक जानकारी भी पाउचों पर नहीं छपी थी। जिसके बाद सैंपलिंग की कार्रवाई की गई है।
- सुरेश जादव, एसडीएम अशोकनगर
ऐसे समझें इस गड़बड़ी को...
इस पूरे मामले में सबसे खास बात ये है कि पानी का ऐसा गंदा खेल केवल अशोकनगर में ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के कई जिलों में जारी है। लेकिन इसके बावजूद आला अधिकारियों द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिए जाने के चलते हर जिले में खास तौर से गर्मियों में ये व्यवसाय फलता फूलता है।
यह हैं नियम
नियम के अनुसार पानी पाउच में निर्माण तिथि, एक्सपायर समय आदि की जानकारी होने के अलावा वहीं कंपनी पानी बेच सकती है, जिसने फूड एंड विबरेजेज का लाइसेंस लिया हो व उसे आईएसआई का प्रमाण पत्र मिला हो। पॉउच में कंपनी का नाम व पता होना भी जरूरी है।
पॉउच से यह जानकारियां रहती हैं गायब
कंपनी का पता, आईएसआई मार्का, निर्माण तिथि सहित अधिकांश जरूरी चीजें इन अमानक पॉउचों से नदारत रहती हैं।
ऐसे करते हैं अपना बचाव :
गर्मियों के मौसम में कुकुरमुत्ते की तरह से पैदा हो जाने वाली यह कंपनियां अपने बचाव के लिए पॉउचों पर कई चीजे लिख लेतीं हैं ताकि इन्हें कोई परेशानी न हो।
पॉउच पर न तो पेय जल लिखा जाता है और साथ ही यह जरूर लिख दिया जाता है कि यदि पाउॅच के पानी में कुछ दिखे तो इसे न लें। इन पर कंपनी का पता व अन्य जरूरी चीजें नहीं होने से भी यह सदैव परेशानियों से बचतीं रहतीं हैं।
जल्द ही आइएसआइ मिलने का करते हैं दावा : यदि कोई जागरूक उपभोक्ता इस पॉउच पर आईएसआई मार्का नहीं होने की बात भी उठाता है तो दुकानदार या वहां बैठा कंपनी का बंदा कंपनी को जल्द ही आईएसआई मार्का मिलने की बात कह कर उपभोक्ता को गलत जानकारी उपलब्ध कराते हैं।
इस पर भी जब उपभोक्ता नहीं मानता तो कहते है कई लाख रुपया लगाया है, आईएसआई के लिए भेजा है जल्द मिल जाएगा। लोगों को बरगला कर दुकानदारों व कंपनी चालकों द्वारा अपने मुनाफे के लिए बीमार बनाया जा रहा है।
पहचाने अमानक पानी, ऐसे रखें स्वास्थ्य का ख्याल : पानी के वह पॉउच जिनमें आईएसआई मार्का नहीं है, कंपनी का पता व फोन नंबर नहीं है साथ ही पॉउच की निर्माण तिथि व एक्सपायरी तिथि भी नदारत है।
ऐसे पॉउच जिनमें यह सब न हो उन्हें देखते ही समझ जाए कि इनमें अमानक पानी हो सकता है। इस तरह के पॉउचों का पानी नहीं पी कर आप अपने स्वास्थ्य को ठीक रख सकते हैं।
जानकार बताते हैं गर्मी के मौसम में जब भी बाहर जाएं खूब पानी पीकर निकले ताकि प्यास न के बराबर लगे और जरूरत हो तो जहां तक हो सके अपने घरों से ही पानी साथ लेकर चलें।
इसके बाद भी यदि कभी पानी नहीं होने पर प्यास लगे और पॉउच लेकर पानी पीना ही पड़े तो कम से कम पॉउच का पूरा निरीक्षण कर लें, वहीं पॉउच लें जो आईएसआई एप्रूवड हो और जिस पर सारी जानकारी उपलब्ध हों।
वहीं बताया जाता है कि बीआइएस की ओर से केवल जो लोग आइएसआइ मार्का का दुरुपयोग करते हैं, उनके खिलाफ ही कार्रवाई की जाती है। जबकि अमानक पानी की कार्रवाई का अधिकार स्थानीय प्रशासन के खाद्य व औषधि विभाग के पास होता है।
इसके अलावा यदि बीआइएस के पास शिकायत भी आती है तो वह उसे खाद्य व औषधि विभाग को ही फारर्ड कर देते हैं, ताकि वे ही ऐसे मामलों में कार्रवाई करें।
Updated on:
13 Oct 2019 02:46 pm
Published on:
13 Oct 2019 12:42 pm
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