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इन खास वजहों से चंदेरी में शूट हुई अनुष्का-वरूण स्टारर सुई धागा

इन खास वजहों से चंदेरी में शूट हुई अनुष्का—वरूण स्टारर सुई धागा

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इन खास वजहों से चंदेरी में शूट हुई अनुष्का-वरूण स्टारर सुई धागा

अशोकनगर। जिले की प्रसिध्द जगह चंदेरी, जो कि 11वीं शताब्दी में मध्य भारत का प्रमुख व्यापार केंद्र था। पिछले कुछ दिनों से चंदेरी शहर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इसकी मुख्य वजह है, अनुष्का और वरूण धवन की आने वाली फिल्म सुई धागा। इस फिल्म की शूटिंग चंदेरी शहर में ही चल रही है। जिसके बाद लोगों ने कयास लगाने शुरू कर दिए है कि यह फिल्म चंदेरी सिल्क पर आधारित हो सकती है। आपको बता दें कि अशोकनगर जिले में स्थित चंदेरी बुन्देलखंडी शैली की साड़ियों के लिए काफी प्रसिद्ध है। जो कि पारंपरिक हस्तनिर्मित साड़ियों का एक प्रसिद्ध केंद्र है।

पिछले कुछ दिनों पहले बॉलीवुड एक्टर वरूण धवन और अनुष्का शर्मा की आने वाली फिल्म सुई धागा की शूटिंग यही हुई है। अनुष्का ने जनवरी में फिल्म के एक सीन का फोटो भी ट्विटर पर शेयर किया था। जिसमें वे कढ़ाई करते हुए नजर आ रही थी। साथ ही वरूण ने भी सिलाई करते हुए अपनी फोटो शेयर की थी। जानकारी के अनुसार यह फिल्म यहां के मशहूर चंदेरी सिल्क पर आधारित हो सकती है। इस फिल्म को शरद कटारिया डायरेक्ट कर रहे हैं।

इतिहास की नजर से
आपको बता दें कि चंदेरी सिल्क और व्यापार के लिए फेमस रहे शहर पर गुप्त, प्रतिहार, गुलाम, तुगलक, खिलजी, अफगान, गौरी, राजपूत और सिंधिया वंश का शासन रहा है। राणा सांगा ने चंदेरी को महमूद खिलजी से जीता था. जब सभी प्रदेशों पर मुगल शासक बाबर का आधिपत्य था तो 1527 में एक राजपूत सरदार ने चंदेरी पर अपनी पताका लहराई. इसके बाद इसके शासन की बागडोर जाट पूरनमल के हाथों में गई। अंत में शेरशाह ने छल से पूरनमनल को हराकर इस किले पर कब्जा किया. यहां पर 9वीं और 10वीं सदी के कई जैन मंदिर स्थित हैं। इसकी वजह से यहां जैन तीर्थयात्री बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

700 साल पुराना है चंदेरी का इतिहास
आपको बता दें कि हमारा प्रदेश चंदेरी की साड़ियों के लिए भी मशहूर है। यहां चंदेरी की साड़िया बनाने का काम लगभग 700 साल पहले शुरू हुआ था। विंध्यांचल का यह इलाका बुनकरी के लिए भी जाना जाता है। क्योंकि दूसरी शताब्दी से ही यह शहर बुनकरों का केंद्र बिंदु रहा है।

तीन तरह का फैब्रिक किया जाता है पसंद
चंदेरी को तीन तरह के फैब्रिक के लिए पसंद किया जाता है- प्योर सिल्क, चंदेरी कॉटन और सिल्क कॉटन। चंदेरी की शुरूआत 1890 में हुई थी। जब बुनकरों के हाथों से निर्मित यॉर्न के स्थान पर मिल द्वारा निर्मित यॉर्न से कपड़ा बुना जाने लगा। इस प्रकार चंदेरी के विकास की शुरुआत हुई। जब यॉर्न के उपयोग के बाद अंग्रेज, मैनचेस्टर से कोलकाता होते हुए सूती धागा चंदेरी लेकर आए तो यह चंदेरी फैब्रिक के इतिहास में एक बड़ा बदलाव लेकर आया।

पर्यटन की दृष्टि से भी है खास
यह शहर सिर्फ चंदेरी कपड़ों के लिए ही नहीं बल्कि पर्यटन के लिए भी जाना जाता है। यहां बुंदेला राजपूतों द्वारा बनाया गया चंदेरी किला आकर्षण का केंद्र है। इसकी खास बात यह है कि यहां का मुख्य दरवाजा खूनी दरवाजे के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा कोशक महल जिसे महमूद खिलजी ने बनवाया था। वह भी घूमने की अच्‍छी जगह है. ईसागढ़ चंदेरी से लगभग 45 किलोमीटर दूर है जहां कई खूससूरत मंदिर हैं जो दसवीं शताब्दी की शैली में बनाए गए हैं. यहां एक क्षतिग्रस्त बौद्ध मठ भी देखा जा सकता है.

परमेश्वर ताल को बुंदेला राजपूत राजाओं ने बनवाया था इस ताल के समीप एक मंदिर है. जामा मस्जिद मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी मस्जिदों में शुमार है. देवगढ़ किला चंदेरी से 25 किलोमीटर दूर स्थित है. इस किले में कई जैन मंदिर हैं. जहां कुछ अतिप्राचीन मूर्तियां देखी जा सकती हैं.

और भी फिल्में हो चुकी है शूट
आपको बता दें कि सुई धागा, चंदेरी में शूट होने वाली अकेली फिल्म नहीं है। श्रृद्धा कपूर और राजकुमार राव स्‍टारर फिल्‍म 'स्‍त्री' की शूटिंग भी चंदेरी में हुई है.