
मंदिर बंद होने से परिसर में छाया सन्नाटा
अशोकनगर. चंदेरी स्थित मां जागेश्वरी मंदिर में मां जागेश्वरी ने सुबह की आरती के दौरान सिंदूर का चोला छोड़ दिया. इससे मंदिर को चार दिन के लिए बंद कर दिया गया है। चार दिन तक श्रद्धालु दर्शन नहीं कर सकेंगे। इसके साथ ही मां जागेश्वरी को अखंड ज्योति में स्थापित कर दिया गया है, इससे अब ज्योति स्वरूप में मां की पूजा होगी। 60 साल बाद यह घटना हुई है.
मां जागेश्वरी मंदिर के पुजारी पंडित मनोजकुमार चौबे ने बताया कि मां हर 60 साल में सिंदूर का चोला छोड़ देती हैं। इससे अब मां जागेश्वरी और परिसर में स्थित गौरी गणेश, काल भैरव, बटुक भैरव, हनुमत, मां नागेश्वरी और मां मंशा का चोला अलग-अलग थैलों में प्रयागराज ले जाया जाएगा। यहां पूजा-अर्चना के साथ चोला विसर्जित करेंगे और गंगाजल लाया जाएगा।
मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्ण पद्धति से मां को प्रतिमा से अखंड ज्योति में स्थापित कर दिया गया है. गुरुवार शाम तक चोला एकत्रित किया जाएगा। चार दिन बाद वैदिक पद्धति से मंत्रोच्चार के साथ आह्वान व पूजन-यज्ञ कर अंखड ज्योति से मां जागेश्वरी को फिर प्रतिमा में स्थापित किया जाएगा। तब तक मां को कोई भोग भी नहीं लगेगा।
द्वापर युगीन है मंदिर, यहां गिरा था मां सती का मुख
पुजारी मनोजकुमार चौबे के मुताबिक यह मंदिर द्वापर युग का है, यहीं पर मां सती का मुख गिरा था। इससे यहां पर मां सती का प्राकृतिक मुख है, इससे यह सभी 52 शक्तिपीठों का प्रधान शक्तिपीठ माना जाता है। मां के प्राकृतिक मुख एवं 2251 शिवलिंगों के साथ यह स्थान शिव शक्ति का संगम स्थल है और इसका उल्लेख शिव महापुराण में है। पुजारी ने बताया कि यहां पर मां जागृत अवस्था में हैं और इसीलिए इन्हें मां जागेश्वरी कहा जाता है। महाशिवरात्रि पर वैदिक पद्धति से पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए मंदिर खोल दिया जाएगा।
Published on:
16 Feb 2023 12:00 pm
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