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चुनाव ने खोली पोल: मनरेगा पोर्टल पर बायंगा व मथनेर में 9 अजजा परिवार, कई ने पोखर निर्माण में मजदूरी भी की

ग्रामीण बोले अजजा महिला न होने से सरपंच पद खाली, मनरेगा पोर्टल ने खोली पोल।

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चुनाव ने खोली पोल: मनरेगा पोर्टल पर बायंगा व मथनेर में 9 अजजा परिवार, कई ने पोखर निर्माण में मजदूरी भी की

चुनाव ने खोली पोल: मनरेगा पोर्टल पर बायंगा व मथनेर में 9 अजजा परिवार, कई ने पोखर निर्माण में मजदूरी भी की



अशोकनगर. जिले की दो ग्राम पंचायतों में अनुसूचित जनजाति महिला के लिए आरक्षित सरपंच पद खाली रह गए, जिन पर नामांकन जमा नहीं हुए। ग्रामीणों के मुताबिक पंचायत में इस वर्ग की महिला ही नहीं है। जबकि मनरेगा पोर्टल दोनों ग्राम पंचायतों में इस वर्ग के नौं परिवार होना दिखा रहा है। जिनमें से कई लोगों ने मनरेगा में मजदूरी पर पैसा भी लिया।
मामला अशोकनगर जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत मथनेर और ईसागढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत बायंगा का है। जहां सरपंच पद अनुसूचित जनजाति महिला के लिए आरक्षित था, लेकिन दोनों ही ग्राम पंचायतों में सरपंच पद पर किसी ने नामांकन ही जमा नहीं किया। नतीजतन दोनों ग्राम पंचायतों में सरपंच पद खाली रह गए और इससे यहां सरपंच पद का चुनाव नहीं होगा। इसका कारण ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत में इस वर्ग की कोई महिला ही नहीं है। जब पत्रिका ने पड़ताल की तो मनरेगा पोर्टल पर बायंगा ग्राम पंचायत में अनुसूचित जनजाति वर्ग के 7 परिवारों में 56 व्यक्ति दर्ज मिले, तो वहीं मथनेर ग्राम पंचायत में इसी वर्ग के दो परिवारों में आठ सदस्य दर्ज मिले। इन परिवारों के कई महिलाएं भी दर्ज हैं।
रिकॉर्ड: पोखर निर्माण व चारागाह विकास में मजदूरी भी की
मनरेगा पोर्टल अनुसार बायंगा पंचायत में अनुसूचित जनजाति के जोखीराम व उसके परिवार के गुड्डीबाई, रामकिशन, भारती, नितेश, दीक्षा, दिनेश और भोगीराम ने 2021 में 3 जुलाई से 9 नवंबर तक मनरेगा में पोखर निर्माण और चारागाह विकास के काम मे मजदूरी की, जिसकी इस परिवार को मजदूरी भी मिली। वहीं इसी पंचायत में इसी वर्ग की मुन्नीबाई व उसके परिवार के रामकिशन, पानबाई ब्रजभान, मालती, राजू, भरत और सुमन ने तीन जुलाई से 21 अक्टूबर तक पोखर निर्माण व चारागाह विकास के काम मे मजदूरी भी की।
बड़ा सवाल: जॉब कार्ड फर्जी या नामांकन भरने से रोका गया
मनरेगा पोर्टल पर हो रहे इस खुलासे के बाद सवाल यह उठ रहा है कि जब गांव में अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिला नहीं है तो मनरेगा पोर्टल पर कैसे नाम दर्ज हो गए। लोगों का सवाल है कि क्या पंचायत ने मनरेगा पोर्टल पर फर्जी जॉबकार्ड दर्ज कर फर्जी मजदूरों से मजदूरी कराई, या फिर इस वर्ग की महिलाओं को सरपंच पद पर नामांकन फॉर्म जमा करने से रोक दिया गया। कारण क्या है इसकी हकीकत तो मामले की जांच के बाद ही सामने आएगी। हालांकि एक बात जरूर स्पष्ट होती नजर आ रही है यदि हकीकत में इस वर्ग की महिला पंचायत में नहीं है तो चुनाव ने इस गड़बड़ी की पोल खोल दी।
यह भी खास
-अजजा वर्ग मुन्नीबाई व उनके परिवार की तीन महिलाओं और चार पुरुषों ने मनरेगा में 96 दिन काम किया जिसकी 18528 रुपए मजदूरी भी मिली।
- जोखीराम व उनके परिवार की तीन महिलाओं व चार पुरुषों ने मनरेगा में 97 दिन काम किया और इस काम के लिए उनके परिवार को 18721 रु. मजदूरी भी मिली।
- मनरेगा में जब दो परिवारों में ही छह महिलाएं दर्ज हैं, तो आखिर इन महिलाओं ने सरपंच बनने के लिए नामांकन क्यों नहीं किया।
- जोखीराम के परिवार का जॉबकार्ड 4 जनवरी 2021 को बना मजदूरी की और 14 अप्रैल 2022 को जॉबकार्ड डिलीट कर दिया गया।
- मुन्नीबाई के परिवार का जॉबकार्ड भी 4 जनवरी 2021 को बना और 21 नबंवर 2021 को डिलीट हो गयाए इसी बीच मे परिवार ने मनरेगा में काम किया।
- खास बात यह है कि मनरेगा में मजदूरी करने पर इन परिवारों को फिनो पेमेंट बैंक के खाते में मजदूरी का भुगतान हुआ।
- सवाल यह है कि यदि यह परिवार गांव में रहते ही नहीं हैं, तो फिर फिनो पेमेंट बैंक में इनके खाते कैसे खुले और राशि किसने निकाली।

वर्जन-
हमने 2011 की जनगणना के हिसाब से आरक्षण किया था, जिसमें आरक्षित वर्ग के व्यक्ति शामिल हैं। नामांकन नहीं आए हैं और यदि लोग इसका कारण यह बता रहे हैं कि आरक्षित वर्ग से कोई महिला गांव में नहीं है। तो मनरेगा पोर्टल पर दर्ज जानकारी की जांच कराई जाएगी।
आर उमा महेश्वरी, कलेक्टर