
ashoknagar
अशोकनगर।जिले में परिवार नियोजन
कार्यक्रम के अंतर्गत होने वाले नसबंदी ऑपरेशनों में जिला अब तक फेल रहा है। पिछले
10 सालों से आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो मात्र एक बार ही लक्ष्य की पूर्ति हो सकी
है। वहीं कइयों बार नसबंदी के आंकड़े 50 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच सके।
अधिकारियों व कर्मचारियों की उदासीनता के चलते यह कार्यक्रम औपचारिकता
भर रह गया है। पिछले वर्ष भी लक्ष्य के विरूद्ध मात्र 50 प्रतिशत ऑपरेशन ही हो सके
थे।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा आगामी 2015-16 के लिए भी लक्ष्य निर्घारित
किया है। इसमें सबसे ज्यादा लक्ष्य मुंगावली के लिए 2100 का है, वही सबसे कम
अशोकनगर शहरी क्षेत्र के लिए 785 है। नसबंदी ऑपरेशन के लिए स्वास्थ्य केन्द्रों पर
लगातार कैम्प लगाए जा रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी लक्ष्य की पूर्ति न हो पाना चिंता
का विषय है।
इसमें अधिकारियों व कर्मचारियों की साफ लापरवाही नजर आती
है। लक्ष्य को पूरा करने के लिए सभी विभागों को टारगेट दिया जाता है और मेगा नसबंदी
शिविर में हितग्राही को लेकर नसबंदी कराए जाने को कहा जाता है, लेकिन इसके बाद भी
लक्ष्य की पूर्ति नही हो पा रही है। इसके अलावा नसबंदी कराए जाने के बाद भी ऑपरेशन
फेल होने के कई केस भी सामने आ चुके हैं। इससे साफ जाहिर है कि नसबंदी शिविरों में
कितना कोताही बरती जाती है।
एक मात्र सर्जन
लक्ष्य पूरा न होने
का एक कारण जिले में एक मात्र सर्जन का होना भी है। जिले में सिर्फ डॉ. डीके भार्गव
ही है, जो स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगाए जा रहे शिविरों में नसबंदी ऑपरेशन करते हैं।
लोगों की संख्या ज्यादा होने से एक अकेला व्यक्ति भी ऑपरेशन नहीं कर
सकता। साथ ही ऑपरेशन करने के लिए भी सर्जन के लिए लिमिट निर्घारित की गई है।
इससे ज्यादा ऑपरेशन सर्जन नहीं कर सकता। हालांकि इस परेशानी को देखते हुए
डॉ. डीपी गौतम को भी विभाग द्वारा टे्रनिंग दिलाई गई है। इससे नसबंदी शिविरों में
आने वाले हितग्राहियों के ऑपरेशन भी हो सकेंगे।
नसबंदी कराने में पुरूष
काफी पीछे
अभी तक किए गए ऑपरेशनों पर गौर किया जाए तो नसबंदी कराने में
पुरूष काफी पीछे रहे हैं। वर्ष 2008-09 में 34 पुरूष, 5351 महिलाओं ने नसबंदी
ऑपरेशन कराए। इसी प्रकार 2009-10 में 17 पुरूष, 4998 महिलाएं, 2010-11 में 64
पुरूष, 6573 महिलाएं, 2011-12 में 83 पुरूष, 6639 महिलाएं, 2012-13 में 87 पुरूष,
5782 महिलाएं, 2013-14 में 20 पुरूष, 4473 महिलाएं, 2014-15 में 21 पुरूष, 4131
महिलाएं नसबंदी करा चुकी हैं।
लोगों में जागरूकता की कमी
लोगों
में जागरूकता की कमी है, इसके कारण लोग नसबंदी कराने से पीछे हटते हैं। स्वास्थ्य
विभाग द्वारा समय-समय पर कैम्प लगाए जाते हैं। पहले एक डॉक्टर था। अब चंदेरी से डॉ.
डीपी गौतम को भी बुलाया गया है। यह कार्यक्रम सर्वागीण विकास कार्यक्रम है, जिसमें
सभी का सहयोग जरूर होता है। डा. रामवीरसिंह रघुवंशी, सीएमएचओ जिला
चिकित्सालय
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