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सेना और इमरान खान के गठजोड़ से हारा हाफिज सईद, बेटे और दामाद की जमानत जब्त

हाफिज ने पाकिस्‍तान में धर्म के नाम पर लोगों की सहानुभूति हासिल कर उसने जमात जैसे आतंकी संगठन को खड़ा किया। उस वक्त इस संगठन को सेना और सरकार दोनों का समर्थन मिला।

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सेना और इमरान खान के गठजोड़ से हारा हाफिज सईद, बेटे और दामाद की जमानत जब्त

लाहौर। पाकिस्तान चुनाव के परिणामों की तस्वीर करीब-करीब साफ हो चुकी है। पाकिस्तान में बुधवार को हुए आम चुनाव में क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान सत्ता में आते दिख रहे हैं। पाकिस्तान में नेशनल असेम्बली के वोट बुधवार को डाले गए थे। मतदान समापत होते ही पूरे देश में वोटों की गिनती शुरू हो गई थी। देर रात तक आये रुझानों से यह साफ़ हो गया था कि पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है। ताजा सूरत ए हाल के मुताबिक पाकिस्तान में हंग असेम्बली बनती हुई दिखाई दे रही है।इन चुनावों में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि हाफिज सईद की पार्टी बुरी तरह चुनाव हार गई है।

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हाफिज को खुदा हाफिज

पाकिस्‍तानी अवाम ने हार्डकोर आतंकवाद को पूरी तरह से नकार दिया।ग्लोबल टेररिस्ट हाफिज सईद का इन चुनावों में सूपड़ा साफ हो गया है। अल्लाह हू अकबर तहरीक के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हाफिज के कैंडिडेट्स को वहां के लोगों ने आम चुनाव में पूरी तरह से नकार दिया है। यहां तक कि नेशनल असेंबली के लिए हुए आम चुनाव में हाफिज के बेटे और दामाद की जमानत जब्‍त हो गई है।

लद गए हाफिज के दिन

इन चुनावों से एक बात साफ हो गई यही कि जमात उद दावा (जेयूडी) जैसे आतंकी संगठनों के दिन पाकिस्‍तान में लद गए हैं। और देश की राजनीति में इनका कोई वजूद नहीं बचा है। हाफिज ने पाकिस्‍तान में धर्म के नाम पर लोगों की सहानुभूति हासिल कर उसने जमात जैसे आतंकी संगठन को खड़ा किया। उस वक्त इस संगठन को सेना और सरकार दोनों का समर्थन मिला। हर बात में भारत और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बरसने वाले हाफिज सईद की तकरीरों को पाकिस्तानी अवाम ने शुरू शुरू में खूब पसंद किया। इससे हाफिज को लगने लगा था कि वह पाकिस्तान के ऊपर राज कर सकता है लेकिन जनता ने जिस तरह हाफिज को पटखनी दी है, उससे वह जमीन पर पसरा नजर आ रहा है।

बेटे और दामाद तक हार गए चुनाव

चुनाव आयोग द्वारा मान्‍यता नहीं मिलने के बाद उसने अल्‍लाह हू अकबर पार्टी के चुनाव चिन्‍ह पर 260 उम्‍मीदवार मैदान में उतारे थे। हाफिज सईद का बेटा हाफिज तल्हा और दामाद खालिद वलीद भी मैदान में थे। रुझानों में एक भी सीट पर हाफिज सईद के उम्‍मीदवार नजर नहीं आ रहे हैं। पाकिस्तान के ताजा सूरत-ए-हाल को देखते हुई कह सकते हैं कि पाकिस्‍तान की जनता ने आतंकी मंसूबों को पूरी तरह से नकार दिया है।हाफिज सईद को इन चुनावों से तगड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान के बहाने दक्षिण एशिया पर हुकूमत का सपना देख रहे हाफिज को इससे उबरने में काफी देर लगेगी।

सईद पर भारी पड़ा सेना और इमरान का गठजोड़

जानकरों के बीच इस बात की चर्चा है कि आखिर अपने चुनावी भाषणों में भीड़ जुटाने वाला हाफिज सईद वोट क्यों नहीं बटोर पाया! कहा जा रहा है कि इमरान पीटीआई की जीत के पीछे पाक सेना का हाथ है। शुरू में सईद को समर्थन देकर उसे बढ़ावा देने वाली पाकिस्तान सेना ने सईद का साथ छोड़कर इमरान का दामन पकड़ लिया।

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इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि सईद जैसे हार्डकोर आतंकी को शह देना पाकिस्तान सेना के लिए बैक फायर का काम करता। जिसकी कीमत सेना को देर-सवेर जरूर चुकानी पड़ती। यह भी था कि जब सेना के सामने जब इमरान खान जैसे जल्दी से प्रभावित होने वाले लीडर मौजूद हैं तो वह हाफिज सईद जैसे कड़ियल और कट्टर नेता को समर्थन क्यों देती ? पाकिस्‍तान की सेना या तो आतंकी संगठनों को बढ़ावा दे सकती थी या फिर इमरान को आगे बढ़ा सकती थी । सेना ने तय किया कि वह सॉफ्ट टेररिज्‍म को बढ़ावा देगी और इस नजरिये से इमरान खान परफेक्ट थे।