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जैश के मदरसे पर रहस्य बरकरार, तस्वीर लेने वाले अमरीकी सैटेलाइट का इसरो से है कनेक्शन

- भारतीय वायुसेना का दावा है कि उन्होंने अपने लक्ष्य को मार गिराया - निजी सैटेलाइट से ली गई यह तस्‍वीर चार मार्च की है- मदरसे को कोई नुकसान नहीं हुआ  

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Balakot

बालाकोट: सेटेलाइट तस्वीर में जैश का मदरसा सही सलामत दिखाई दिया

नई दिल्ली। पाकिस्‍तान के बालाकोट में भारतीय वायुसेना की ओर से किए गए हवाई हमले में जैश-ए-मोहम्‍मद के प्रशिक्षण शिविर को ध्‍वस्‍त करने का दावा किया जा रहा है। इस बीच मीडिया में आई खबर के मुताबिक, बालाकोट में जिस जगह पर हवाई हमला हुआ, वहां अभी भी जैश का मदरसा जस का तस बना हुआ है। हालांकि भारतीय वायुसेना का दावा है कि उन्होंने अपने लक्ष्य को मार गिराया है।

मदरसे पर रहस्य बरकरार

कुछ मीडिया संस्थानों ने दावा किया है कि उन्होंने गुरुवार को इस कथित मदरसे या धार्मिक स्कूल का दौरा किया। उनके अनुसार अनुसार जैश की इमारत में नुकसान कोई निशान नहीं देखा गया। आपको बता दें कि उसने इस दावे पर संदेह बरकरार है। लेकिन इस बीच सवाल यह उठ रहे हैं कि जब भारत के पास अपने सैटेलाइट इमेज कहां हैं। भारत के प्लैनेट लैब्स उपग्रह पृथ्वी की निचली कक्षा में घूम रहे हैं। ये उपग्रह पूरे विश्व के लिए चित्र प्रदान करने में सक्षम हैं। लेकिन भारत सरकार ने इनमें से किसी भी उपग्रह का चित्र अभी तक जारी नहीं किया है। गौरतलब है कि एक नीति के रूप में भारत सरकार, नागरिक या सार्वजनिक उपयोग के लिए इस तरह की तस्वीरों को जारी नहीं करता है।

जैश के छह मदरसे

सैन फ्रांसिस्‍को स्‍थित एक निजी सैटेलाइट से ली गई यह तस्‍वीर चार मार्च की है। इन तस्‍वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि बालाकोट में अभी भी जैश के छह मदरसे बने हुए हैं। यह तस्‍वीर भारत की ओर से की गई एयर स्‍ट्राइक के छह दिन बाद जारी हुईं हैं। अब तक हमले वाली जगह की साफ तस्वीरें सामने नहीं आई हैं, लेकिन प्लैनेट लैब्स की ओर से जारी ये तस्वीरें काफी साफ हैं। तस्‍वीरों में बालाकोट में बने जैश के मदरसों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। मदरसों की दीवारों को भी किसी भी तरह का नुकसान नहीं हुआ है और उसके आसपास के पेड़ भी हरे-भरे दिखाई दे रहे हैं। आपको बता दें कि भारतीय हमलों के दावे पर सवाल खड़ी करने वाली इन तस्वीरों को जिस सैटेलाइट के माध्यम से कैद किया गया है वह इसरो द्वारा ही लॉन्च किया गया था। प्लैनेट लैब्स द्वारा इस्तेमाल की जा रही सैटेलाइटों की लॉन्चिंग इसरो के लांचिंग पैड श्रीहरिकोटा से की गई थी।

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