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बुर्का पहनने पर चीन में पाबंदी, पकड़े जाने पर गिरफ्तार कर भेजा जा रहा है डी-रैडिकलाइजेशन सेंटर

चीन में उइगर मुस्लमानों को लेकर डी-रैडिकलाइजेशन सेंटर बनाया गया है चीनी सरकार का मानना है कि बुर्का पहनने से लोग अतिवादी हो जाते हैं

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बीजिंग। भारत में मुस्लमानों के साथ हुए कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को मुद्दा बनाकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान दुनियाभर में भारत को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन चीन में मुस्लमान समुदाय के साथ हो रही बर्बरता पर वे खामोश हैं।

दुनिया के कई देशों में बुर्का पहनने या नहीं पहनने को लेकर कानून बने हैं, जिसका उल्लंघन करने पर कठोर सजा का भी प्रावाधान है। चीन में भी मुस्लमानों से जड़े एक के बाद एक कई फैसले लिए जा रहे हैं। इसी कड़ी में बुर्का पहनने को लेकर भी अब एक नया फरमान जारी किया गया है।

चीन के शिनजियांग प्रांत में यदि कोई मुस्लिम महिला बुर्का पहनती है या फिर 'अवैध' इस्लामिक वीडियो देखता हुआ पाया जाता है तो उसे डी-रैडिकलाइजेशन सेंटर में भेजा जा सकता है।

चीनी सरकार का मानना है कि ऐसा करने से लोग अतिवादी हो जाते हैं। सरकार ने शिनजियांग प्रांत में रहने वाले उइगुर मुस्लिमों में अतिवाद को रोकने के लिए डी-रैडिकलाइजेशन सेंटर्स बनाए हैं। यहां पर इस कायदे का उल्लंघन करने वालों को भेजा जाता है।

बुर्का पहनने वालों को भेजा जा रहा है डी-रैडिकलाइजेशन सेंटर

चीन में उइगर मुस्लमानों के साथ हो रहे भेदभाव को लेकर इमरान खान खामोश हैं। बुर्का पहनने वाली लड़कियों, औरतों को चीन डी-रैडिकलाइजेशन सेंटर भेज रहा है।

चीन के इस नए फरमान से पीड़ित शिनजियांग में रहने वाली 28 वर्षीया मेहरबान शिमिह ने बताया कि जून 2018 में उसे बुर्का पहनने के आरोप में वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर में भर्ती किया गया था।

उन्होंने बताया कि वह अपनी सास के दबाव के कारण पश्चिमी ड्रेस नहीं पहनती थीं। शिमिह की सास और उनके पति इबलियम कादर को भी आम लोगों को उकसाने के आरोप में 17 साल जेल की सजा सुनाई गई है।

चीनी अधिकारियों का मानना है कि शिमिह भी अतिवादी विचारों से प्रभावित हैं और इस संदेह में उन्हें डी-रैडिकलाइजेशन सेंटर भेजा गया है।

शिमिह के मुताबिक, उनके पड़ोसियों ने पुलिस को उनके बुर्का पहनने की जानकारी दी थी। अभी तक 275 लोगों को डि-रैडिकलाइजेशन सेंटर भेजा जा चुका है। इसमें से 11 महिलाएं शामिल हैं।

आपको बता दें कि चीन की ओर से उइगर मुस्लमानों के लिए इस तरह के डि-रैडिकलाइजेशन कैंप में रखे जाने को लेकर दुनियाभर में निंदा हो रही है।