
भूटान: छोटे हिमालयी देश ने दुनिया को सिखाई हैं अनोखी बातें, भारत ने अपनाया खुशहाली सूचकांक
नई दिल्ली। हिमालय की तलहटी में बसे छोटे से देश भूटान ने दुनिया को एक से बढ़कर एक चीजें दी हैं। राजाओं द्वारा शासित इस देश में बिना किसी मांग और विद्रोह के लोकतंत्र स्थापित कर दिया गया । जीडीपी को आर्थिक विकास सूचकांक के रूप में उपयोग करने के बजाय, भूटान चार स्तंभों के माध्यम से अपने विकास को मापता है। ये स्तम्भ हैं टिकाऊ विकास, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक संरक्षण, और सुशासन। इस चार चरों को मिलाकर सकल राष्ट्रीय खुशहाली सूचकांक या जीएनएच का निर्माण होता है।
क्या खास हैं भूटान में
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि अमीर होने की तुलना में खुशहाल होना अधिक महत्वपूर्ण है। इस आइडिया को महत्व देते हुए भूटान ने दुनिया को खुशहाली के आधार पर विकास का मापन करने का विचार दिया। भूटान दुनिया का एकमात्र कार्बन सिंक है। क्योंकि यह जितना कार्बन डाई आक्साइड पैदा करता हैं, उससे अधिक अवशोषित करता हैं।यह हाइड्रो-इलेक्ट्रिकल पावर बेचता है। यह एकमात्र ऐसा देश है जिसका सबसे बड़ा निर्यात नवीकरणीय ऊर्जा में है। देश का 72% प्राकृतिक जंगलों से घिरा है। किसी को भी लुप्तप्राय वन्य प्रजाति की हत्या करने वालों के लिए कठोर दंड का विधान हैं। भूटान में प्लास्टिक और तंबाकू पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं।
भारत ने अपनाया खुशहाली सूचकांक
मध्य प्रदेश देश में पहला ऐसा राज्य बन गया जिसने पड़ोसी देश भूटान की तर्ज पर "आम लोगों के जीवन में खुशी" सुनिश्चित करने के लिए एक अलग मंत्रालय का गठन किया। राज्य के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने खुशहाली विभाग के निर्माण की घोषणा करते हुए कहा कि "रोटी, कपडा और मकान जैसी जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं के अलावा लोगों को अपने जीवन में खुश होने के लिए और भी बहुत कुछ चाहिए।" मध्य प्रदेश ने विशेषज्ञों का एक पैनल गठित किया जो लोगों के जीवन में खुशी सुनिश्चित करने के लिए सरकार को सुझाव देगा। इससे पहले अप्रैल 2016में 'खुशहाली विभाग' की घोषणा करते हुए सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि खुशी केवल भौतिकवादी संपत्तियों या विकास के साथ लोगों के जीवन में नहीं आएगी।
Published on:
17 Sep 2018, 12:56 PM IST
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