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15 दिन के भीतर तिब्बत में चीनी सेना का दूसरा बड़ा अभ्यास, भारत को बैकफुट पर रखने की तैयारी

भारतीय सीमा के निकट होने वाला यह सैन्य अभ्यास एक पखवाड़े बाद दूसरा सैन्य अभ्यास है। चीन में इस अभ्यास के बारे में खूब चर्चाएं हो रही हैं और चीन की मीडिया ने भी इस मुद्दे को खूब उछाला है। पीएलए की मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 29 जून को भी चीनी सैनिक तिब्बत में जमा हुए थे और भारत से सटे इस दुर्गम क्षेत्र में अभ्यास किया है।

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चीनी सेना

15 दिन के भीतर तिब्बत में चीनी सेना का दूसरा बड़ा अभ्यास, भारत को बैकफुट पर रखने की तैयारी

तिब्बत । चीनी सैनिकों ने तिब्बत में फिर से सैन्य अभ्यास किया है। भारतीय सीमा के पास तिब्बत में पिछले पंद्रह दिन के भीतर यह दूसरा अभ्यास है।चीन की स्पेशल फाॅर्स ने इस अभ्यास में हिस्सा लिया। इसके अलावा इस अभ्यास में तिब्बत टेरिटोरियल फोर्स की जवान भी शामिल थे। पीपल्स लिबरेशन आर्मी के मुताबिक तिब्बत में ऊंचाई वाले क्षेत्र में एक काल्पनिक सीमा बनाई गई और दुश्मन की सीमा की भीतर हमला करने का अभ्यास किया गया।

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भारत की सीमा के करीब हुआ अभ्यास

भारतीय सीमा के निकट होने वाला यह सैन्य अभ्यास एक पखवाड़े बाद दूसरा सैन्य अभ्यास है। चीन में इस अभ्यास के बारे में खूब चर्चाएं हो रही हैं और चीन की मीडिया ने भी इस मुद्दे को खूब उछाला है। पीएलए की मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 29 जून को भी चीनी सैनिक तिब्बत में जमा हुए थे और भारत से सटे इस दुर्गम क्षेत्र में अभ्यास किया है। चीन की एक अखबार के मुताबिक हालिया सैन्य अभ्यास भारत की साथ भविष्य में होने वाली किसी संघर्ष के मद्देनजर तैयारी के लिए था।

क्या अभ्यास की वजह भारत है ?

दुश्मन की सीमा की पीछे जाकर हमला करने की नीति चीन की एक प्रभावी रणनीति रही है जिसका इस्तेमाल वह अपने युद्ध जीतने की लिए करता है। विशेषज्ञों की मानें तो इस तरह का गुरिल्ला अटैक चीन के लिए युद्ध जीतने की कुंजी है। माना जा रहा है कि स्पेशल कॉम्बैट फोर्सेज के साथ ट्रेनिंग के कारण चीनी पायलट जंगली इलाके में हमले करने की अपनी क्षमता को बढ़ा पाएंगे। भारत में कमोवेश ऐसी ही परिस्थितियां हैं।

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इस युद्ध अभ्यास को भारत सरकार और सेना की लिए एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि चीन दक्षिणी तिब्बत के रूप में भारत के पूर्वी राज्य अरुणाचल के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है। यह ड्रिल मध्य तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र और यारलंग ज़ांगबो नदी के निचले हिस्सों में आयोजित किया गया था। यह इलाका ब्रह्मपुत्र नदी की ऊपरी क्षेत्र में स्थित है। यारलंग जांगबो नदी अरुणाचल की सीमा बनाती हुई भारत में प्रवेश करती है जहां असम में ब्रह्मपुत्र नाम दिये जाने से पहले इसे सियांग कहा जाता है।