27 मई 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

चीन की अनोखी पहल, अपने शहरों को रोशन करने के लिए बना रहा है ‘चांद’

चीन 2020 तक अपना खुद का कृत्रिम चांद अंतरिक्ष में छोड़ने की योजना बना रहा है।

2 min read
Google source verification
china artificial  moon

चीन की अनोखी पहल, अपने शहरों को रोशन करने के लिए बना रहा है 'चांद'

बीजिंग। चीन ने एक अनोखी पहल करते हुए अपने शहरी इलाकों को रात में रोशन करने के लिए चांद बनाने की परियोजना पर काम कर रहा है। देश की सड़कों से स्ट्रीट लाइट हटाने और बिजली पर आने वाली लागत को घटाने के उद्देश्य से चीन 2020 तक अपना खुद का कृत्रिम चांद अंतरिक्ष में छोड़ने की योजना बना रहा है।

अमरीका: वाइट हाउस ने जारी किया आधिकारिक बयान, कहा- पत्रकार जमाल खशोगी की मौत से दुःख है

चीन बनाएगा चांद

चीन के समाचार पत्र चाइना डेली में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन, दक्षिण पश्चिमी सिचुआन प्रांत के चेंगदु शहर को रोशन करने के लिए एक लाइट प्रोडक्शन सेटेलाइट छोड़ने पर काम कर रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह सेटेलाइट वास्तविक चांद की तरह ही चमकेगा और इसकी तुलना में आठ गुना अधिक रोशनी देगा।परियोजना पर काम कर रहे अर्धसरकारी वैज्ञानिक संगठन तियान फु न्यू एरिया साइंस सोसाइटी के प्रमुख वु चुनफेंग ने कहा कि पहला मानव निर्मित चांद शिन्चियांग उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र से 2020 में छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर प्रक्षेपण सफल रहा तो 2022 में तीन और कृत्रिम चांद कुछ अन्य शहरों के लिए भी प्रक्षेपित किए जाएंगे।

चीन का दावा: भूस्खलन से रुका ब्रह्मपुत्र का पानी, कहा- भारत को पहले ही बता दिया गया था

चांदनी में नहाएगा चीन

चाइना डेली ने अपनी खबर में कहा है कि चांद का पहला प्रक्षेपण 2020 में होगा जो केवल प्रायोगिक होगा। इसके सफल रहने के बाद 2022 में भेजे जाने वाले सभी उपग्रह वास्तविक होंगे। इनको नागरिक एवं वाणिज्यिक हितों के लिए प्रयोग किया जाएगा। इन उपग्रहों में सोलर एनर्जी को सोखने वाले पैनल लगे होंगे। इन पैनलों से मिली ऊर्जा को ये उपग्रह रात में बिजली कि रोशनी में तब्दील कर देगा। बताया जा रहा है कि सूर्य से प्रकाश से चमकने वाले ये उपग्रह चांद 50 वर्ग किलोमीटर तक के इलाके को रोशन करने में सक्षम होंगे। अगर ऐसा हुआ तो चीन अपनी सड़कों से स्ट्रीट लाइट हटा सकेगा। दावा किया जा रहा है कि इससे सालाना 1.2 अरब युआन (17 करोड़ डॉलर) की बचत होगी।